Dharm Desk – भगवान शिव को सबसे सरल और भोले देवता माना जाता है, जो सच्ची श्रद्धा और भाव से की गई पूजा से तुरंत प्रसन्न हो जाते है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक खास परंपरा ऐसी भी है. जिसे करने से शिव कृपा बेहद शीघ्र प्राप्त होती है? यह परंपरा है… बेलपत्र पर ‘राम-राम’ लिखकर शिवलिंग पर अर्पित करना होता है. यह सुनने में जितना साधारण लगता है, इसके पीछे उतनी ही गहरी धार्मिक मान्यता और आस्था जुड़ी हुई है.

धार्मिक मान्यत के अनुसार, भगवान शिव स्वयं भगवान राम के परम भक्त हैं. यही कारण है कि ‘राम नाम’ उन्हें अत्यंत प्रिय है. कहा जाता है कि जब माता पार्वती ने भगवान शिव को पाने के लिए कठोर तप की. तब उन्होंने बेलपत्र पर ‘राम’ नाम लिखकर शिव को अर्पित किया था. उनकी इस भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया. तभी से यह परंपरा विशेष फल को देने वाली है और आज भी श्रद्धालु इसे पूरी आस्था के साथ निभाते हैं.

  1. सावन में बढ़ जाता इस उपाय का प्रभाव

सावन माह भगवान शिव को अत्यंत प्रिय होता है। इस दौरान यदि भक्त चंदन या कुंकुम से बेल पत्र पर ‘राम-राम’ लिखकर शिवलिंग पर अर्पित करते है तो उन्हें विशेष फल प्राप्त होता है । मान्यता है कि इससे सभी बाधाएं दूर होती है। जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

  1. धन-धान्य और मनोकामना पूर्ति होती है

ऐसा कहा जाता है कि ‘राम नाम’ लिखे बेलपत्र चढ़ाने से भगवान शिव प्रसन्न होकर भक्तों की हर इच्छा पूरी करते है । साथ ही धन-धान्य, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद भी प्रदान करते है।

  1. बेल पत्र न हो तो भी पूजा संभव

यदि किसी कारण से बेलपत्र उपलब्ध न हो, तो श्रद्धा से की गई मानस पूजा भी उतनी ही प्रभावशाली मानी जाती है । भक्त अक्षत (चावल) से भी भगवान शिव की पूजा कर सकते हैं। यहां तक कि पहले से चढ़ाए गए बेलपत्र को धोकर पुनः अर्पित करना भी शास्त्रों में मान्य है।

  1. चित्रकूट में विशेष रूप से प्रचलित है यह परंपरा

चित्रकूट के प्राचीन मत्यगजेंद्र नाथ मंदिर में यह परंपरा विशेष रूप से देखी जाती है । यहां भक्त दूध और जल के साथ ‘राम-राम’ लिखे बेल पत्र भगवान शिव को अर्पित करते है । मान्यता है कि समुद्र मंथन के बाद भगवान शिव को यहां शांति के लिए स्थापित किया गया था। तभी से यह स्थान शिव भक्ति का प्रमुख केंद्र बना हुआ है.