लखनऊ. शिक्षा व्यवस्था और NEET पेपर लीक मामले में जवाबदेही की मांग को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक पिछले 20 दिनों से दिल्ली के जंतर-मंतर पर आमरण अनशन पर बैठे हैं. उनकी प्रमुख मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और सरकार के साथ बातचीत की है. हालांकि अब तक केंद्र सरकार की ओर से उनसे कोई औपचारिक वार्ता नहीं हुई है. इसी बीच उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री संजय निषाद के बयान ने इस मुद्दे को नया राजनीतिक रंग दे दिया है.
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‘विपक्ष समर्थन नहीं, मरवाने की कोशिश कर रहा’
यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय निषाद ने कहा कि विपक्ष सोनम वांगचुक का समर्थन नहीं कर रहा, बल्कि उन्हें मरवाने की कोशिश कर रहा है. उन्होंने कहा, “किसी की जिद से कुछ नहीं होता. लोकतंत्र में जनता तय करती है कि कौन किस पद पर रहेगा.” उनके मुताबिक किसी व्यक्ति के इस्तीफे की मांग केवल दबाव बनाकर नहीं मनवाई जा सकती.
‘अच्छे लोगों को फंसाकर फायदा उठाता है विपक्ष’
संजय निषाद ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्षी दल अक्सर अच्छे लोगों को आगे कर अपना राजनीतिक हित साधने की कोशिश करते हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि किसी मंत्री को पद पर रहना चाहिए या नहीं, इसका फैसला सड़क पर बैठे लोग नहीं बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था और जनता करती है.
20 दिन से अनशन पर हैं सोनम वांगचुक
बता दें कि सोनम वांगचुक 20 दिनों से जंतर-मंतर पर आमरण अनशन कर रहे हैं. उनका कहना है कि NEET पेपर लीक जैसे गंभीर मामले में सरकार को जवाबदेह होना चाहिए और शिक्षा मंत्री को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए. उनकी मांग है कि सरकार बातचीत कर समाधान निकाले.
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डॉक्टरों ने जताई स्वास्थ्य को लेकर चिंता
लंबे अनशन का असर अब सोनम वांगचुक की सेहत पर भी दिखाई देने लगा है. डॉक्टरों के अनुसार उनका वजन 9 किलो से अधिक घट चुका है और लगातार भूख हड़ताल के कारण शरीर के महत्वपूर्ण अंग प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है. हालांकि वांगचुक ने हाल ही में जारी एक वीडियो संदेश में कहा था कि वे फिलहाल ठीक हैं और कुछ दिन और संघर्ष जारी रख सकते हैं.

