सिरसा: हरियाणा के सिरसा जिले में बिजली निगम के भीतर नियमों को ताक पर रखकर काम करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ एक बहुत बड़ी कार्रवाई सामने आई है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के कड़े रुख के बाद, एक अवैध ट्यूबवेल कनेक्शन मामले में तीन SDO, तीन JE और एक अपर डिवीजन क्लर्क (UDC) समेत कुल नौ कर्मियों को दोषी पाया गया है। विभाग ने इन सभी दोषियों के खिलाफ चार्जशीट तैयार कर मुख्यालय भेज दी है, जिससे अब इन पर कड़ी गाज गिरनी तय मानी जा रही है।

क्या है पूरा मामला?

यह पूरा विवाद साल 2010 से जुड़ा हुआ है। सिरसा के कल्याण नगर निवासी रूप चंद ने जिला कष्ट निवारण समिति की बैठक में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के मुताबिक, उन्होंने साल 2021 में रामजी लाल नाम के व्यक्ति से एक जमीन खरीदी थी, जिस पर पहले से ही एक ट्यूबवेल कनेक्शन चल रहा था।

लेकिन हैरान करने वाली बात यह थी कि वह ट्यूबवेल कनेक्शन किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर और किसी दूसरे की जमीन पर बिना किसी उचित जांच-पड़ताल के जारी कर दिया गया था। जमीन के नए मालिक इस अवैध कनेक्शन को बंद करवाना चाहते थे, जिसके बाद यह धोखाधड़ी सामने आई।

मुख्यमंत्री के आदेश पर हुई विजिलेंस जांच मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इसकी गहन जांच का जिम्मा एडीसी (ADC) को सौंपा था। इसके साथ ही इस पूरे प्रकरण की विजिलेंस जांच भी कराई गई। जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि तत्कालीन और वर्तमान अधिकारियों ने मिलीभगत करके बिना अनुमति और बिना आवश्यक कानूनी प्रक्रिया के इस कनेक्शन को दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया था। इस हेरफेर के लिए जरूरी एस्टीमेट तो भेजा गया, लेकिन बिना कोई सरकारी राशि जमा कराए ही कनेक्शन को गुपचुप तरीके से दूसरी जगह चालू कर दिया गया।

इन अधिकारियों पर गिरी गाज

विजिलेंस और प्रशासनिक जांच रिपोर्ट के आधार पर बिजली निगम सिरसा के अधीक्षण अभियंता (SE) आशुतोष पांचाल ने सभी नौ दोषियों के खिलाफ चार्जशीट मुख्यालय भेज दी है। दोषी पाए गए मुख्य अधिकारियों में शामिल हैं:

  • वर्तमान SDO: विकास ठकराल
  • तत्कालीन SDO: ओमप्रकाश और रमेश कुमार
  • तत्कालीन JE: नवनीत, गुरलाल और एस.एस. सोढ़ी
  • UDC: जगदीश, भूप सिंह और जयकिशन
  • फोरमैन: नरेश कुमार (तत्कालीन फोरमैन, जिन्हें विजिलेंस जांच में दोषी पाए जाने के बाद पहले ही चार्जशीट किया जा चुका है)

अधीक्षण अभियंता ने साफ किया है कि नियमों को ताक पर रखकर गैर-कानूनी तरीके से काम करने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा। दोषी पाए गए कर्मचारियों में से एक SDO और एक JE पहले ही सेवानिवृत्त (रिटायर) हो चुके हैं, लेकिन नियमानुसार कार्रवाई की आंच उन तक भी पहुंचेगी। मुख्यालय से हरी झंडी मिलते ही इन सभी पर आगामी विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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