ढेंकानाल: ओडिशा की ढेंकानाल स्थित विशेष विजिलेंस अदालत ने सरकारी धन के गबन और भ्रष्टाचार के एक मामले में ढेंकनाल के पूर्व कलेक्टर व सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी नित्यानंद मोहंती सहित तीन लोगों को दोषी ठहराया है। अदालत ने मामले में अंतिम फैसला सुनाते हुए तीनों दोषियों को एक-एक साल के कठोर कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई है।

मामले में दोषी पाए गए अन्य दो व्यक्तियों में जिला ग्रामीण विकास एजेंसी ढेंकानाल के पूर्व प्रोजेक्ट डायरेक्टर सूर्यनारायण दास और परिवहन ठेकेदार सत्यनंद बालासामंत शामिल हैं। विजिलेंस विभाग द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, यह मामला वर्ष 2001-02 का है जब नित्यानंद मोहंती ढेंकनाल के जिला कलेक्टर के रूप में कार्यरत थे। उस दौरान श्रम-गहन कार्य कार्यक्रम के तहत भारतीय खाद्य निगम के ढेंकानाल गोदाम से विभिन्न ब्लॉक और ग्राम पंचायत मुख्यालयों तक चावल और गेहूं के परिवहन के लिए निविदाएं बुलाई गई थीं।

आरोप है कि ओडिशा सिविल सप्लाई कॉर्पोरेशन द्वारा निर्धारित मानक परिवहन दरों का पालन करने के बजाय तत्कालीन डीआरडीए प्रोजेक्ट डायरेक्टर सूर्यनारायण दास ने बढ़ी हुई दरों का प्रस्ताव रखा, जिसे तत्कालीन कलेक्टर नित्यानंद मोहंती ने मंजूरी दे दी। नियमों का उल्लंघन करते हुए ठेकेदार सत्यनंद बालासामंत द्वारा प्रस्तुत हैंड कोटेशन को स्वीकार किया गया और उसे अत्यधिक दर पर भुगतान किया गया। इस फर्जीवाड़े के कारण राज्य के खजाने को लगभग ₹9 लाख का वित्तीय नुकसान पहुंचा था।

विजिलेंस विभाग ने जांच पूरी होने के बाद तीनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 और भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 420 (धोखाधड़ी), 468 (जालसाजी), 471 और 120-बी (अपराधिक षड्यंत्र) के तहत चार्जशीट दाखिल की थी।

अदालत द्वारा दोषसिद्धि का फैसला सुनाए जाने के बाद, विजिलेंस विभाग ने स्पष्ट किया है कि चूंकि नित्यानंद मोहंती और सूर्यनारायण दास दोनों ही अब सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त हो चुके हैं, इसलिए संबंधित सक्षम प्राधिकारी से संपर्क कर इन दोनों पूर्व अधिकारियों की पेंशन को पूरी तरह से बंद करने के लिए कानूनी कदम उठाए जाएंगे।

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