राजधानी दिल्ली में मॉनसून के दौरान जल-जमाव की समस्या पर प्रभावी नियंत्रण के लिए दिल्ली सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता (Rekha Gupta) के निर्देश पर सभी 13 जिलों में जिला-स्तरीय समन्वय समितियों (District Level Coordination Committees-DLCCs) का गठन किया गया है। इन समितियों का उद्देश्य जल-जमाव की समस्या की रोकथाम, मॉनसून तैयारियों की निगरानी और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है।

सरकार के अनुसार, जिला-स्तरीय समितियां जल-जमाव की आशंका वाले क्षेत्रों की लगातार निगरानी करेंगी और समय रहते एहतियाती कदम उठाएंगी। इसके अलावा, मॉनसून से जुड़ी रणनीतियों और स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOPs) के प्रभावी क्रियान्वयन की भी समीक्षा की जाएगी, ताकि बारिश के दौरान किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।

सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव की ओर से जारी आदेश के अनुसार, प्रत्येक जिले के जिलाधिकारी (DM) संबंधित जिला-स्तरीय समन्वय समिति के अध्यक्ष होंगे। समिति में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल किया गया है, ताकि जल-जमाव की स्थिति में त्वरित और समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। इसमें संबंधित नगर निगम के उपायुक्त, सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग, लोक निर्माण विभाग (PWD), संबंधित नगर निगम, नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC), दिल्ली छावनी बोर्ड, दिल्ली जल बोर्ड और दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) के संबंधित कार्यकारी इंजीनियर सदस्य होंगे। इसके अलावा संबंधित जिले के अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (यातायात) भी समिति का हिस्सा होंगे, जिससे बारिश के दौरान यातायात प्रबंधन को बेहतर बनाया जा सके।

जिले में सेवाएं देने वाली बिजली वितरण कंपनियों बीएसईएस (BSES) और टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड (TPDDL) के प्रतिनिधियों को भी समिति में शामिल किया गया है। वहीं, संबंधित जिले के अतिरिक्त जिलाधिकारी (ADM) समिति के सदस्य सचिव के रूप में कार्य करेंगे और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बनाए रखने की जिम्मेदारी निभाएंगे।

निगरानी की जिम्मेदारी समन्वय समितियों पर

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के निर्देश पर गठित ये समितियां मॉनसून की तैयारियों से जुड़े सभी उपायों के प्रभावी क्रियान्वयन और उनकी नियमित निगरानी की जिम्मेदारी निभाएंगी। सरकार के अनुसार, जिला-स्तरीय समन्वय समितियां राज्य-स्तरीय समन्वय समिति (SLCC) द्वारा निर्धारित स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOPs) का पालन सुनिश्चित करेंगी। साथ ही मॉनसून से पहले और बारिश के दौरान जल-जमाव की आशंका वाले क्षेत्रों में समय रहते आवश्यक कदम उठाने और संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर विशेष ध्यान देंगी।

किन कामों को देखेंगी समितियां?

सरकार के अनुसार, समितियां विभिन्न नालों के आपस में जुड़ने वाले पॉइंट्स पर संबंधित एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करेंगी। साथ ही बेल-माउथ (Bell Mouth) की नियमित सफाई, नालों से गाद निकालने (डी-सिल्टिंग), जरूरत पड़ने पर अस्थायी पंप लगाने और जल-जमाव की आशंका वाले क्षेत्रों का निरीक्षण करने जैसे कार्यों की निगरानी भी करेंगी। इसके अलावा, जिला-स्तरीय समितियां उन स्थानों की पहचान करेंगी जहां बारिश के दौरान पानी भरने की संभावना अधिक रहती है। इन इलाकों में पहले से आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित की जाएंगी और जमीनी स्तर पर व्यवस्थाओं की लगातार समीक्षा की जाएगी, ताकि किसी भी समस्या का समय रहते समाधान किया जा सके।

बेहतर समन्वय से रुकेगा जलभराव

मुख्यमंत्री ने कहा कि राजधानी में मानसून के दौरान आम लोगों को जल-जमाव से होने वाली परेशानियों से बचाने के लिए सभी संबंधित विभागों को समन्वित तरीके से काम करना होगा। इसी उद्देश्य से गठित जिला-स्तरीय समितियां विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करेंगी, जिससे जल निकासी व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि इन समितियों के माध्यम से जलभराव की रोकथाम के लिए समय रहते आवश्यक कदम उठाए जाएंगे, संभावित जलभराव वाले क्षेत्रों की लगातार निगरानी की जाएगी और किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। इससे न केवल नागरिकों की सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि बारिश के दौरान राजधानी में आवश्यक और नागरिक सेवाएं भी बिना किसी बाधा के जारी रह सकेंगी।

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