दिल्ली सरकार राजधानी की जेल व्यवस्था को आधुनिक, सुरक्षित और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। नरेला में प्रस्तावित हाई सिक्योरिटी जेल परियोजना (Narela high-security jail project) का दायरा बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। इसके तहत परियोजना में 27 एकड़ अतिरिक्त भूमि शामिल करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। सरकार की योजना केवल जेल की क्षमता बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि एक एकीकृत सुधार परिसर (Integrated Correctional Complex) विकसित करने की भी है। इसके माध्यम से कैदियों के पुनर्वास, सुधार और कौशल विकास से जुड़ी सुविधाओं को भी मजबूत किया जाएगा।
27 एकड़ अतिरिक्त जमीन मांगेगी दिल्ली सरकार
दिल्ली सरकार राजधानी की जेल व्यवस्था को आधुनिक और अधिक सक्षम बनाने के लिए नरेला में प्रस्तावित हाई सिक्योरिटी जेल परियोजना का विस्तार करने जा रही है। इसके तहत सरकार ने 40 एकड़ के प्रस्तावित हाई सिक्योरिटी जेल परिसर से सटी 27 एकड़ अतिरिक्त भूमि चिन्हित की है। अधिकारियों के अनुसार, इस अतिरिक्त जमीन के आवंटन के लिए जल्द ही DDA को औपचारिक प्रस्ताव भेजा जाएगा। डीडीए की मंजूरी मिलने के बाद परियोजना के विस्तार की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। सरकारी सूत्रों का कहना है कि अतिरिक्त भूमि मिलने के बाद नरेला में अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त इंटीग्रेटेड करेक्शनल कॉम्प्लेक्स विकसित किया जाएगा। इस परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ प्रशासनिक गतिविधियों और कैदियों के सुधार एवं पुनर्वास से जुड़े कार्यक्रमों के लिए भी पर्याप्त स्थान उपलब्ध कराया जाएगा।
तिहाड़ समेत अन्य जेलों पर कम होगा दबाव
दिल्ली की जेलों में लगातार बढ़ रही बंदियों की संख्या को देखते हुए सरकार नई क्षमता विकसित करने पर विशेष जोर दे रही है। नरेला में प्रस्तावित हाई सिक्योरिटी जेल परियोजना के विस्तार के लिए 27 एकड़ अतिरिक्त भूमि शामिल किए जाने की योजना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, अतिरिक्त भूमि मिलने के बाद भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अधिक संख्या में कैदियों को रखने की व्यवस्था विकसित की जा सकेगी। इससे राजधानी की प्रमुख जेलों, विशेषकर Tihar Jail सहित अन्य कारागार परिसरों पर बढ़ते दबाव को कम करने में मदद मिलेगी।
सरकार का मानना है कि नई सुविधाओं और बढ़ी हुई क्षमता के साथ जेल प्रबंधन को अधिक व्यवस्थित बनाया जा सकेगा। इससे सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी और कैदियों के पुनर्वास एवं सुधार से जुड़े कार्यक्रमों को भी बेहतर तरीके से संचालित किया जा सकेगा। अधिकारियों ने बताया कि भूमि आवंटन की स्वीकृति मिलने के बाद परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार की जाएगी। डीपीआर में निर्माण कार्य, सुरक्षा ढांचा, प्रशासनिक सुविधाएं और सुधारात्मक गतिविधियों से जुड़े विभिन्न पहलुओं का विस्तृत खाका तैयार किया जाएगा। इसके बाद निर्माण कार्य शुरू करने की औपचारिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। निर्धारित नियमों के तहत अतिरिक्त भूमि के आवंटन के लिए दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) को तय शुल्क का भुगतान भी किया जाएगा।
140 करोड़ रुपये की परियोजना, 21 महीने में पूरा करने का लक्ष्य
नरेला में प्रस्तावित हाई सिक्योरिटी जेल परियोजना को गृह मंत्रालय की केंद्रीय योजना के तहत विकसित किया जा रहा है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना की कुल लागत लगभग 140 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है। अधिकारियों के अनुसार, परियोजना के लिए केंद्र सरकार ने 100 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है, जबकि शेष 40 करोड़ रुपये का खर्च दिल्ली सरकार वहन करेगी। सरकार का उद्देश्य राजधानी की जेल व्यवस्था को आधुनिक बनाना और बढ़ती जरूरतों के अनुरूप नई क्षमता विकसित करना है। परियोजना के निर्माण कार्य को 21 महीने के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया पहले से जारी है और आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं।
दिल्ली की जेलों की मौजूदा तस्वीर
दिल्ली की जेल व्यवस्था इस समय क्षमता से कहीं अधिक बंदियों का दबाव झेल रही है। राजधानी में फिलहाल तिहाड़, रोहिणी और मंडोली सहित 3 प्रमुख जेल परिसर हैं, जिनके अंतर्गत कुल 16 जेलें संचालित की जा रही हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इन जेलों की स्वीकृत क्षमता 10,026 कैदियों की है, जबकि वर्तमान में यहां लगभग 19,500 बंदी मौजूद हैं। यानी जेलों में निर्धारित क्षमता के मुकाबले लगभग दोगुने कैदी रह रहे हैं, जिससे भीड़भाड़ की समस्या लगातार बढ़ती जा रही है।
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