शब्बीर अहमद, भोपाल। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के सख्त रुख के बाद भोपाल के ऐतिहासिक बड़े तालाब की वास्तविक सीमा का निर्धारण नए सिरे से किया जाएगा। वर्तमान में तालाब का जलस्तर फुल टैंक लेवल (FTL) के करीब होने के कारण सीमा तय करने के लिए आधुनिक तकनीकों—जैसे जियो-टैगिंग, ड्रोन सर्वे, ग्राउंड ट्रुथिंग, रिमोट सेंसिंग और सैटेलाइट इमेजरी का सहारा लिया जाएगा।

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पिलरों की भी जियो-टैगिंग

एनजीटी द्वारा गठित कमेटी को अगले 15 दिनों के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। इस नए सर्वे से तालाब, वेटलैंड, बफर जोन और ‘जोन ऑफ इन्फ्लुएंस’ (प्रभावित क्षेत्र) के दायरे में आने वाले सभी प्रकार के निर्माणों को सटीक रूप से चिह्नित किया जाएगा। इसके तहत तालाब के पुराने मुनार और पिलरों की भी जियो-टैगिंग की जाएगी।

अतिक्रमण पर चलेगा बुलडोजर, 3 महीने की मोहलत

तालाब के नए सीमांकन से अवैध निर्माणों की संख्या में बड़ा इजाफा होने की आशंका है। इससे पहले मार्च से जून के बीच हुए शुरुआती सीमांकन में 347 अतिक्रमणों की पहचान की गई थी। नियमों के तहत निर्माण गतिविधियों पर कड़े प्रतिबंध लागू होंगे। शहरी क्षेत्र: FTL से 50 मीटर के दायरे में किसी भी तरह के स्थायी या अस्थायी निर्माण पर पूरी तरह रोक रहेगी। ग्रामीण क्षेत्र: FTL से 250 मीटर के दायरे में किसी भी प्रकार का निर्माण प्रतिबंधित होगा।

मध्यप्रदेश

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एनजीटी के स्पष्ट निर्देश हैं कि वेटलैंड, बफर जोन और ‘जोन ऑफ इन्फ्लुएंस’ में पाए जाने वाले सभी अवैध और अनाधिकृत निर्माणों को आगामी तीन महीने के भीतर हर हाल में हटाना होगा। इस नए सर्वे के बाद भोपाल के बड़े तालाब के जलग्रहण क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त कराने की दिशा में एक बड़ी कार्रवाई की उम्मीद जताई जा रही है।

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