बलवंत भट्ट, मंदसौर। कहते हैं कि ‘जाको राखे साइयां मार सके न कोई’… यह कहावत मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले में उस वक्त सच साबित हुई, जब भानपुरा क्षेत्र के लोधखेड़ी गांव में एक 5 दिन के बेबस और मासूम नवजात की जिंदगी पर बड़ा संकट आ खड़ा हुआ। जहां एक ओर ममता को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई, वहीं दूसरी ओर ग्रामीणों की सहृदयता और पुलिस की इंसानियत ने उस नन्ही सी जान को नया जीवन दे दिया।
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ममता हारी, लेकिन ‘मानवता’ जीत गई
लोधखेड़ी गांव के पास जब किसी राहगीर और ग्रामीणों की नजर लावारिस हालत में पड़े इस 5 दिन के मासूम पर पड़ी तो हर किसी का दिल पसीज गया। बेबस पड़े बच्चे की रोने की आवाज सुनते ही ग्रामीणों ने बिना एक पल गंवाए उसे संभाला, प्यार से पुचकारा और तुरंत पुलिस को सूचना दी।
देवदूत बनकर पहुंची पुलिस
भानपुरा पुलिस की टीम ने भी संवेदनशीलता की मिसाल पेश की। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और नन्हे से बच्चे को किसी अपने की तरह गोद में लेकर सुरक्षा की छांव दी।
डॉक्टर बोले- मासूम पूरी तरह सुरक्षित और स्वस्थ है
पुलिस टीम मासूम को लेकर तुरंत अस्पताल पहुंची, जहां डॉक्टरों ने प्यार और देखभाल के साथ उसका पूरा मेडिकल चेकअप किया। डॉक्टरों की जांच में 5 दिन का यह मासूम बच्चा पूरी तरह से सुरक्षित और स्वस्थ पाया गया है।
अस्पताल में प्राथमिक देखभाल और मेडिकल प्रक्रिया पूरी होने के बाद पुलिस ने पूरी ममता और जिम्मेदारी के साथ बच्चे को बाल कल्याण समिति के सुपुर्द कर दिया है, जहां अब उसका पालन-पोषण पूरी सुरक्षा और प्यार के साथ होगा।
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भले ही जन्म देने वाले ने इस मासूम का साथ छोड़ दिया, लेकिन ग्रामीणों की सतर्कता, पुलिस और डॉक्टरों की सहदयता ने यह साबित कर दिया कि दुनिया में आज भी इंसानियत और दयालुता जिंदा है।
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