अजय सैनी, भिवानी। हरियाणा के भिवानी के गांव ढाणी लक्ष्मण निवासी शिक्षिका मनीषा मौत मामले में गांव के बाबा धर्मदास मंदिर में पंचायत हुई। जिसमें कन्नी सर्व समाज न्याय समिति और अन्य लोगों ने भाग लिया। पंचायत में फैसला लिया गया कि अब 7 जून को गांव ढाणी लक्ष्मण में प्रदेश स्तरीय महापंचायत होगी। जिसमें आगे की घोषणा होगी। तब तक सरकार व सीबीआई को समय दिया गया है। हालांकि पहले 24 मई को पंचायत बुलाकर फैसला लेने की बात कही गई थी। इस पंचायत की अध्यक्षता कन्नी प्रतिनिधि पूर्व बीडीसी धर्मवीर बुढेड़ा ने तथा मंच संचालन धर्मपाल बारवास ने किया।

मृतक मनीषा के पिता संजय ने कहा कि उन्होंने परिवार के साथ अनशन का फैसला लिया हुआ था। क्योंकि उनकी बेटी को आज तक न्याय नहीं मिला है। लेकिन कन्नी खाप ने उन्हें 7 जून तक रुकने के लिए कहा है। तब तक सीबीआई खुलासा नहीं करती है और दोषियों को उजागर नहीं करती है तो आंदोलन का फैसला लिया जाएगा। संघर्ष बहुत लंबा चल चुका है। सीबीआई की जांच भी पूरी हो चुकी है, लेकिन खुलासा नहीं कर रहे। उन्होंने मांग की है कि उनकी बेटी को न्याय दिलाया जाए। अन्यथा वे अनशन जैसा कोई बड़ा फैसला लेने को मजबूर होंगे। हालांकि अभी कन्नी खाप ने 7 जून को महापंचायत बुलाई है। जिसमें पूरे हरियाणाभर से लोग पहुंचेंगे और यह महापंचायत गांव ढाणी लक्ष्मण में ही आयोजित की जाएगी। उसके बाद अंतिम फैसला लिया जाएगा। हालांकि उनके परिवार की अनसन करने की इच्छा थी।

भारतीय किसान यूनियन के जिला अध्यक्ष मेवा सिंह आर्य ने कहा कि मनीषा मौत मामले में सरकारी तंत्र को यह लग रहा था कि बेटी के पिता दोषी हो सकते हैं। इस बारे में हमारी संजय से बात हो चुकी है। संजय का कहना है हमारी बेटी को न्याय दिलाओ, हम सबको इस न्याय की लड़ाई में एकजुट होना होगा।

भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश सचिव आजाद भुगला ने कहा कि पैदल यात्रा को करीब दो महीने हो चुके हैं। इस मामले को डीसी भिवानी के माध्यम से उठाया। लेकन सरकार के कान पर जूं नहीं रेंगी। हमारी लडाई अन्याय से है। हमें जब तक न्याय नहीं मिलेगा, शांति प्रिय ढंग से आंदोलन जारी रहेगा।

स्वराज युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष युद्धवीर सिंह खरेटा ने कहा कि सरकार तक एक बात पहुंचा दी जाए, कि हम सब की बहन बेटियों की सुरक्षा करना उसकी जिम्मेदारी है। जब तक मनीषा को न्याय नहीं मिलेगा हम शांति से बढ़ने वाले नहीं, सरकार को झुकना पड़ेगा। पंचायत की एक परंपरा रही है कि जिस काम को लेकर चली है उसका फैसला नहीं होने तक संघर्ष जारी रहेगा। सीबीआई जांच हो चुकी है खुलासा नहीं कर रहे। इससे सरकार को डर है कि कहीं उनकी किरकरी हो जाएगी।