राजधानी दिल्ली के साउथ कैंपस से सटे सत्य निकेतन इलाके में रविवार को हुए दर्दनाक इमारत हादसे में मौतों का आंकड़ा बढ़कर 6 हो गया है। संकरी गली में संचालित हो रही करीब 30 साल पुरानी पांच मंजिला पेइंग गेस्ट (PG) इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और राहत-बचाव अभियान चलाकर मलबे से लोगों को बाहर निकाला गया। हादसे की गंभीरता को देखते हुए अब दिल्ली नगर निगम (MCD) भी एक्शन मोड में आ गया है। निगम ने हादसे वाली इमारत के आसपास मौजूद जर्जर और खतरनाक इमारतों को लेकर कार्रवाई शुरू कर दी है। इन इमारतों की स्थिति की जांच की जा रही है, ताकि किसी दूसरे बड़े हादसे की आशंका को टाला जा सके।
हादसे की भयावहता को देखते हुए दिल्ली नगर निगम (MCD) ने तुरंत संज्ञान लिया है। निगम ने दुर्घटनाग्रस्त इमारत के ठीक बगल में स्थित मकान नंबर 13, सत्य निकेतन को खतरनाक घोषित करते हुए वहां नोटिस चस्पा कर दिया है। MCD की ओर से यह नोटिस दिल्ली नगर निगम अधिनियम, 1957 की धारा 348, धारा 491 के साथ पठित के तहत जारी किया गया है। नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि इमारत की हालत बेहद जर्जर और खतरनाक है। इसकी मौजूदा स्थिति के कारण वहां रहने वाले लोगों के साथ-साथ आसपास से गुजरने वाले लोगों की जान को भी गंभीर खतरा बना हुआ है।
3 दिन में इमारत गिराने का आदेश
MCD ने मकान मालिक को नोटिस मिलने के तीन दिनों के भीतर खतरनाक इमारत को स्वयं ध्वस्त करने का आदेश दिया है। निगम ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि अगर तय समय सीमा के भीतर मकान मालिक ने आदेश का पालन नहीं किया, तो MCD खुद इस इमारत को गिराएगी। निगम की ओर से यह भी साफ किया गया है कि इमारत को ध्वस्त करने में आने वाला पूरा खर्च मकान मालिक से बकाया कर के रूप में वसूल किया जाएगा। यानी निर्धारित अवधि में कार्रवाई नहीं करने पर न सिर्फ निगम इमारत को अपने स्तर पर गिराएगा, बल्कि ध्वस्तीकरण का खर्च भी संपत्ति मालिक पर डाला जाएगा।
NDRF के स्निफर डॉग्स की ली जा रही मदद
बहरहाल, घटनास्थल पर NDRF (National Disaster Response Force) की विशेष टीमें लगातार राहत और बचाव अभियान में जुटी हुई हैं। मलबे के विशाल ढेर में दबे लोगों का सुराग लगाने के लिए NDRF के विशेष रूप से प्रशिक्षित स्निफर डॉग्स की मदद ली जा रही है। राहतकर्मी आधुनिक उपकरणों के जरिए मलबा हटाने के साथ-साथ संभावित स्थानों पर जिंदगी की तलाश में जुटे हैं।
आपातकालीन एजेंसियां मौके पर तैनात
हादसे की सूचना मिलते ही दिल्ली दमकल सेवा, स्थानीय पुलिस और NDRF की संयुक्त टीमें मौके पर पहुंच गई थीं। इसके बाद से ही सभी एजेंसियां लगातार राहत-बचाव अभियान चला रही हैं। मलबा हटाने के साथ ही एंबुलेंस और मेडिकल टीमों को भी अलर्ट पर रखा गया है, ताकि किसी भी जीवित व्यक्ति के मिलने पर उसे तुरंत चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराई जा सके। राहत-बचाव अभियान के दौरान मलबे के हर हिस्से की सावधानीपूर्वक जांच की जा रही है।
प्रति बेड 12 हजार रुपये किराया, मेंटेनेंस पर उठे सवाल
सत्य निकेतन हादसे ने छात्रों से भारी किराया वसूलने वाले PG संचालकों की व्यवस्थाओं और सुरक्षा इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दिल्ली पुलिस में कार्यरत स्थानीय निवासी राजन छेत्री के मुताबिक, हादसे का शिकार हुई पांच मंजिला इमारत में करीब 15 कमरे थे। प्रत्येक कमरे में दो से तीन छात्र रहते थे और मकान मालिक प्रति छात्र 12 हजार रुपये प्रति बेड किराया वसूलता था। बताया जा रहा है कि यहां केरल, हरियाणा और उत्तर प्रदेश से आए छात्र रह रहे थे, जो दिल्ली विश्वविद्यालय के मोतीलाल नेहरू कॉलेज, आत्माराम सनातन धर्म (ARSD) कॉलेज और श्री वेंकटेश्वर कॉलेज में पढ़ाई कर रहे थे। इतना किराया वसूले जाने के बावजूद इमारत के रखरखाव और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हादसे के बाद अब यह जांच का विषय है कि इमारत की संरचनात्मक स्थिति, रखरखाव और सुरक्षा मानकों को लेकर जिम्मेदार पक्षों ने कितनी गंभीरता दिखाई थी।
जर्जर इमारतों का होगा सुरक्षा ऑडिट
सत्य निकेतन में हादसे में 6 छात्रों की मौत के बाद प्रशासन ने आसपास की पुरानी और बहुमंजिला इमारतों को लेकर भी सख्ती बढ़ा दी है। इलाके में ऐसी इमारतों की पहचान कर उनका सुरक्षा ऑडिट कराया जा रहा है। MCD और स्थानीय पुलिस प्रशासन का फोकस यह सुनिश्चित करने पर है कि घनी आबादी वाले इस स्टूडेंट हब में किसी जर्जर या असुरक्षित इमारत की वजह से दोबारा ऐसी त्रासदी न हो। सुरक्षा जांच के दौरान खतरनाक स्थिति में मिली इमारतों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
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