भारत ने अपनी वायु शक्ति को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए फ्रांस को 114 अत्याधुनिक राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए औपचारिक लेटर ऑफ रिक्वेस्ट (LoR) जारी कर दिया है। करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाला यह समझौता भारतीय रक्षा इतिहास के सबसे बड़े लड़ाकू विमान सौदों में शामिल माना जा रहा है।
सबसे खास बात यह है कि प्रस्तावित डील के तहत अधिकांश राफेल विमानों का निर्माण भारत में किया जाएगा, जिससे ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को जबरदस्त मजबूती मिलेगी।
भारत में बनेगा राफेल का बड़ा हिस्सा
सूत्रों के अनुसार, 114 विमानों में से लगभग 94 से 96 राफेल जेट भारत में निर्मित किए जा सकते हैं, जबकि शुरुआती खेप सीधे फ्रांस से आएगी। इस परियोजना में 55-60 प्रतिशत तक स्थानीयकरण का लक्ष्य रखा गया है, जिससे भारतीय एयरोस्पेस और रक्षा उद्योग को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।
वायुसेना प्रमुख फ्रांस दौरे पर
भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह इन दिनों फ्रांस के दौरे पर हैं। इस दौरान वह राफेल निर्माता दसॉल्ट एविएशन और मिसाइल निर्माता MBDA की उत्पादन एवं तकनीकी सुविधाओं का निरीक्षण करेंगे। माना जा रहा है कि उनकी यह यात्रा प्रस्तावित मेगा डील को अंतिम रूप देने की दिशा में अहम साबित हो सकती है।
राफेल सौदे की प्रमुख विशेषताएं-
- कुल 114 राफेल लड़ाकू विमान
- 88 सिंगल-सीटर और 26 ट्विन-सीटर ट्रेनर एयरक्राफ्ट
- शुरुआती विमान फ्रांस से, अधिकांश का निर्माण भारत में
- अत्याधुनिक AESA रडार और उन्नत इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम
- लंबी दूरी तक मार करने वाली आधुनिक मिसाइल क्षमताएं
- स्वदेशी हथियारों और भारतीय डेटा लिंक का एकीकरण
- टेक्नोलॉजी ट्रांसफर (ToT) और स्थानीय उत्पादन पर विशेष जोर
AMCA और भविष्य की तकनीक पर भी होगी चर्चा
यह सौदा केवल राफेल विमानों तक सीमित नहीं है। भारत और फ्रांस के बीच भविष्य के रक्षा सहयोग, स्वदेशी AMCA (Advanced Medium Combat Aircraft) कार्यक्रम के लिए इंजन तकनीक, तथा भारत में एयरोस्पेस निर्माण इकोसिस्टम को मजबूत बनाने जैसे मुद्दों पर भी बातचीत होने की संभावना है।
DAC से मिल चुकी है मंजूरी
फरवरी 2026 में रक्षा मंत्री की अध्यक्षता में हुई Defence Acquisition Council (DAC) की बैठक में भारतीय वायुसेना के लिए 114 मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) खरीद परियोजना को Acceptance of Necessity (AoN) प्रदान की जा चुकी है। इसके बाद यह परियोजना तेजी से आगे बढ़ रही है।
भारतीय वायुसेना को मिलेगी नई ताकत
यदि यह सौदा अंतिम रूप लेता है, तो भारतीय वायुसेना की युद्धक क्षमता में ऐतिहासिक बढ़ोतरी होगी। साथ ही भारत न केवल आधुनिक लड़ाकू विमानों का बड़ा ऑपरेटर बनेगा, बल्कि रक्षा निर्माण क्षेत्र में भी वैश्विक स्तर पर अपनी स्थिति और मजबूत करेगा।
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