Dharm Desk : आज मंगलवार, 14 अप्रैल को मेष संक्रांति का पावन पर्व मनाया जा रहा है. पंचांग के अनुसार इस दिन सूर्यदेव मेष राशि में प्रवेश करते है. जिससे सौर नववर्ष की शुरुआत मानी जाती है. इसे विषुवत संक्रांति और सतुआ संक्रांति या सतुआन संक्रांति जैसे अलग-अलग नाम से भी कहा जाता है. इस दिन से खरमास समाप्त हो गया. शादी, सगाई, गृहप्रवेश जैसे सभी मांगलिक कार्यों की शुरुआत हो जाती है.

मेष राशि में सूर्य के प्रवेश को विशेष माना गया है, क्योंकि मेष राशि चक्र की पहली राशि है. सूर्य जब मीन राशि में होते हैं तो उनकी स्थिति कमजोर मानी जाती है, लेकिन मेष में प्रवेश करते ही सूर्य बलवान हो जाते हैं. इसके प्रभाव से करियर, फाइनेंस, लीडरशिप और पर्सनल ग्रोथ में सुधार देखने को मिलता है. साथ ही दिन भी धीरे-धीरे बड़े होने लगते हैं.
स्नान और दान का विशेष महत्व
मेष संक्रांति के दिन स्नान और दान का विशेष महत्व बताया गया है. इस दिन पितरों के लिए तर्पण करना शुभ माना जाता है. जिससे पूर्वज संतुष्ट होते हैं और जीवन की परेशानियां कम होती हैं. जरूरतमंदों को अन्न, धन और वस्त्र का दान करना भी पुण्य दायी माना गया है. मान्यता है कि ऐसा करने से ग्रहों की अशुभता दूर होती है और धन की आवक बनी रहती है.
फसल कटाई की खुशी का प्रतीक
इस दिन सतुआ खाने की परंपरा भी खास मानी जाती है. सतुआ को शुद्ध और पवित्र आहार माना जाता है, जिसे ग्रहण करने से शरीर को ठंडक और ऊर्जा मिलती है. वहीं इसी दिन बैसाखी का पर्व भी मनाया जाता है, जो फसल कटाई की खुशी का प्रतीक है.
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