राकेश चतुर्वेदी, भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र (MP Assembly Monsoon Session) के दौरान सिंगरौली में हाथी विचरण वाले क्षेत्र में कोयला खनन की अनुमति दिए जाने के मुद्दे पर जमकर गर्मागर्मी देखने को मिली। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार पर नियमों के उल्लंघन का सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि कोयला खदान के लिए हाथियों के कॉरिडोर (Elephant Corridor) वाली संवेदनशील जमीन आवंटित कर दी गई है।
सरकार और वन विभाग का पक्ष
नेता प्रतिपक्ष के आरोपों पर पलटवार करते हुए सरकार और वन विभाग ने स्पष्ट किया कि खदान आवंटन प्रक्रिया में किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं हुआ है। वन विभाग के अनुसार, सिंगरौली में कोयला खदान के लिए 1,397.54 हेक्टेयर वन भूमि आवंटित की गई है। सरकार ने सदन को अवगत कराया कि आवंटित जमीन एलिफेंट कॉरिडोर के अंतर्गत नहीं आती है, बल्कि वास्तविक कॉरिडोर खदान से लगभग 5 किलोमीटर दूर स्थित है। एलिफेंट कॉरिडोर की परिधि में खनन अनुमति को लेकर ऐसा कोई प्रतिबंधात्मक नियम नहीं टूटा है और कोल ब्लॉक आवंटन पूरी तरह नियमानुकूल है।
NGT ने जारी किया नोटिस
उल्लेखनीय है कि इस पूरे मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने भी संज्ञान लिया है। NGT ने मध्य प्रदेश सरकार, केंद्र सरकार और अडानी समूह को नोटिस जारी कर इस विषय पर स्थिति स्पष्ट करते हुए जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
फर्जी गेहूं-धान खरीदी पर 10 लोगों पर FIR
मानसून सत्र में जबलपुर जिले के मझौली विकास खंड में शासकीय उपार्जन योजना के तहत किसानों को धान और गेहूं की राशि का भुगतान न मिलने का मामला जोर-शोर से उठा। भाजपा विधायक अजय विश्नोई ने ध्यानाकर्षण सूचना के जरिए इस गंभीर समस्या की ओर सदन का ध्यान आकृष्ट कराया।
फर्जी खरीदी के कारण रुका 174 किसानों का भुगतान
मामले का जवाब देते हुए खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि उपार्जन भुगतान में देरी को लेकर कलेक्टर स्तर पर जांच करवाई गई थी। जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि गेहूं की फर्जी खरीदी दर्ज की गई थी, जिसके चलते 174 पात्र-अपात्र किसानों का भुगतान प्रभावित हुआ है। फर्जी खरीदी मामले में अप्रैल 2026 तक 10 दोषियों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज की जा चुकी है तथा श्रीजी वेयरहाउस के विरुद्ध भी प्रशासनिक कार्रवाई की गई है। मोबाइल टावर रेंज की जांच में जो किसान या खरीदी केंद्र टावर की रेंज से बाहर पाए गए, उनमें से 122 लोगों को अपात्र घोषित किया गया था।
विधायक अजय विश्नोई ने उठाए सवाल
विपक्ष और सत्ता पक्ष के विधायक अजय विश्नोई ने जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा- “घोटाले में शामिल लोगों को ही जांच टीम में रख लिया गया। एफआईआर के बाद आरोपियों को आसानी से जमानत मिल गई। भविष्य में ऐसी फर्जी खरीदी न हो, इसके लिए पुख्ता व्यवस्था होनी चाहिए।” मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने विधायक की आपत्तियों का संज्ञान लेते हुए घोषणा की कि इस मामले की पुनः जांच करवाई जाएगी। इसके लिए एक विशेष कमेटी का गठन किया जाएगा, जिसमें विधायक अजय विश्नोई को भी सदस्य के रूप में शामिल किया जाएगा।
विपक्ष का हमला: “किसानों के साथ भेदभाव”
कमेटी के गठन पर प्रतिक्रिया देते हुए नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि केवल एक विशेष क्षेत्र के लिए कमेटी बना देना और पूरे प्रदेश के अन्य पीड़ित किसानों की अनदेखी करना राज्य के किसानों के साथ स्पष्ट भेदभाव है।
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