शरद पाठक, पांढुर्णा (छिंदवाड़ा)। मध्यप्रदेश के पांढुर्णा में आयोजित प्रसिद्ध गोटमार मेले में परंपरा के नाम पर हुई पत्थरबाजी ने एक बार फिर इसकी खूनी तस्वीर सामने ला दी। जाम नदी के बीच लगाए गए झंडे पर कब्जे को लेकर पांढुर्णा और सावरगांव के लोग आमने-सामने आ गए। दोनों पक्षों की ओर से जमकर पत्थर बरसाए गए, जिसमें 118 लोग घायल हो गए।

पत्थरबाजी के दौरान कई लोगों के सिर में गंभीर चोटें आईं, जबकि एक व्यक्ति के पैर की हड्डी टूट गई। घायलों को इलाज के लिए अस्पताल और स्वास्थ्य शिविरों में पहुंचाया गया। अचानक शुरू हुई पत्थरों की बौछार के बीच कई लोगों को बचने के लिए सुरक्षित स्थानों की ओर भागना पड़ा। गोटमार मेले की परंपरा में दोनों पक्षों के बीच झंडे पर कब्जे को लेकर मुकाबला होता है। नदी के बीच लगे झंडे को हासिल करने के लिए खिलाड़ी पत्थर चलाते हैं।

ये भी पढ़ें: पांढुर्णा में विश्वप्रसिद्ध गोटमार मेला: जाम नदी के तट पर फिर बरसेंगे खूनी पत्थर, 1955 से अब तक 14 मौतें

वर्षों पुरानी इस परंपरा के कारण हर साल बड़ी संख्या में लोग घायल होते रहे हैं और कई बार मौतें भी हो चुकी हैं। प्रशासन की ओर से सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए जाने के बावजूद पत्थरबाजी को पूरी तरह रोकना चुनौती बना हुआ है। घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि सांस्कृतिक परंपरा के नाम पर होने वाले इस आयोजन को हिंसा से मुक्त और सुरक्षित स्वरूप कब दिया जाएगा।

70 साल में 14 मौतें, सैकड़ों घायल

पोला पर्व के दूसरे दिन आयोजित होने वाले इस मेले की शुरुआत मां चंडिका के पूजन और दर्शन के साथ होती है। वर्ष 1955 से लेकर अब तक इस पत्थरबाजी के खेल में 14 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, जबकि हजारों की संख्या में लोग गंभीर रूप से घायल और अपाहिज हुए हैं। प्रशासन ने कई बार रबर बॉल से मेला कराने की कोशिश की, लेकिन हर बार परंपरा के आगे प्रशासन के प्रयास पस्त साबित हुए।

700 जवान, ड्रोन और सीसीटीवी से निगरानी

इस बार भी प्रशासन ने शांति समिति की बैठकें कर लोगों से शांतिपूर्ण उत्सव मनाने की अपील की है। सुरक्षा के मद्देनजर कलेक्टर-एसपी सहित भारी पुलिस बल तैनात है। करीब 700 पुलिसकर्मी ड्रोन कैमरे और सीसीटीवी के जरिए पूरे मेला परिसर पर नजर बनाए हुए है। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट मोड पर रखा गया है।

प्रेम कहानी से जुड़ी है मेले की किवदंती

गोटमार मेले को लेकर कई कहानियां प्रचलित हैं। सबसे लोकप्रिय किवदंती पांढुर्णा के युवक और सावरगांव की युवती की प्रेम कहानी से जुड़ी है। कहा जाता है कि प्रेमी युगल को नदी पार करते समय दोनों गांवों के लोगों ने रोकने के लिए पत्थरबाजी की थी। इसी घटना की याद में गोटमार मेले की परंपरा शुरू हुई। हालांकि, बुजुर्गों का मानना है कि समय के साथ इसमें गोफन और शराब के इस्तेमाल से आक्रामकता और खतरा बहुत बढ़ गया है।

Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m