शब्बीर अहमद, भोपाल। साइबर ठगों का जाल धीरे-धीरे कर अब पूरे मध्यप्रदेश में फैल चुका है। पिछले सिर्फ 7 महीने में प्रदेश में साइबर ठगी के 60 हजार मामले सामने आए हैं। ठग जालसाजी का ऐसा खेल खेलते हैं कि मिनटों में अकाउंट खाली हो जाता है। पीड़ित को जब फर्जीवाड़े का एहसास होता है, तब तक खेल खत्म हो जाता है।

पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, 2026 जनवरी से लेकर 31 जुलाई 2026 तक यानी पिछले 7 महीनों में 60 हजार शिकायतें स्टेट साइबर सेल तक पहुंची। साइबर अपराधियों ने करीब 260 करोड़ की ठगी की। हालांकि पुलिस और बैंकों की मदद से इनमें से करीब 75 करोड़ रुपये होल्ड कराए जा चुके है, लेकिन बाकी रकम का अब तक पता नहीं चल पाया है।

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जांच में सामने आया है कि ज्यादातर जालसाजी देश के अंदर मेवात, अलवर, महाराष्ट्र, असम और पश्चिम बंगाल से बैठकर की जा रही है। वहीं डिजिटल अरेस्ट जैसे नए तरीके के ज्यादातर मामले साउथ एशिया के देशों से ऑपरेट हो रहे हैं, जिसमें पाकिस्तान और बांग्लादेश टॉपर है। मध्यप्रदेश में सबसे ज्यादा मामले इंदौर, भोपाल, जबलपुर और सतना से सामने आए हैं। इन शहरों में डिजिटल अरेस्ट, लोन, पार्सल और इन्वेस्टमेंट के नाम पर लोगों को निशाना बनाया जा रहा है।

साइबर ठगी से कैसे बचे

  • किसी भी अनजान नंबर से वीडियो कॉल ना उठाएं।
  • पुलिस-ED-CBI के नाम पर धमकी या लिंक पर क्लिक न करें।
  • ठगी होने पर तुरंत 1930 पर कॉल करें।
  • cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।
  • किसी भी टास्क या पैसे डबल होने के लालच में न फंसे।
  • कोई भी OTP, बैंक डिटेल फोन पर शेयर न करें और अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें।

ठगी होने पर 1930 पर तुरंत शिकायत दर्ज करवाएं। क्योंकि जालसाजी के बाद एक घंटा गोल्डन ऑवर होता है, जिसमें पुलिस आपके अकाउंट से गायब हुए पैसे को होल्ड करवा सकती है। साइबर ठगी से बचने का एक ही मंत्र है, सतर्क रहें और लालच में ना फंसे क्योंकि अधिकतर जालसाजी पैसे डबल या फिर रुपए कमाने का लालच देकर की जाती है।

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