अनूप दुबे, ढीमरखेड़ा (कटनी)। मध्य प्रदेश के कटनी जिले की ढीमरखेड़ा जनपद पंचायत अंतर्गत आने वाली समरस ग्राम पंचायत गौरा का आश्रित गांव गोरी आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहा है। पहाड़ पर बसे इस गांव को मुख्य मार्ग से जोड़ने वाली 2 किलोमीटर की कच्ची सड़क बरसात के दिनों में पूरी तरह दलदल में तब्दील हो जाती है। इस दुर्गम और कीचड़ भरे रास्ते से होकर नन्हे-मुन्ने स्कूली बच्चों और शिक्षकों को रोजाना जान जोखिम में डालकर स्कूल पहुंचना पड़ता है।
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महिला शिक्षक ने वीडियो बनाकर बयां की पीड़ा
स्कूल में पदस्थ महिला शिक्षिका ने इस दलदल भरी सड़क का वीडियो बनाकर अपनी और बच्चों की पीड़ा उजागर की है। वीडियो में साफ दिख रहा है कि मात्र 2 किलोमीटर का यह सफर तय करने में ही बच्चे और शिक्षक पूरी तरह थक जाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वे बीते दो दशकों से शासन और प्रशासन से मुख्य मार्ग गौरा से गोरी गांव तक पक्की सड़क निर्माण कराने की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन आज तक केवल आश्वासन ही मिला है।
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गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों के लिए आफत
इस बदहाल सड़क का सबसे खौफनाक पहलू आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं के दौरान देखने को मिलता है। बारिश के मौसम में गांव तक एम्बुलेंस या वाहन नहीं पहुंच पाते। बीते वर्ष एक गर्भवती महिला को पहाड़ से नीचे अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही खुले में प्रसव कराना पड़ा था। ग्रामीणों ने एक बार फिर शासन-प्रशासन से गुहार लगाई है कि समरस पंचायत के इस उपेक्षित गांव में जल्द से जल्द पक्की सड़क का निर्माण कराया जाए, ताकि हादसों और कठिनाइयों पर विराम लग सके।
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