कुंदन कुमार/ पटना। ​बिहार की राजनीति में आज एक बड़ी हलचल देखने को मिली। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के मुख्य प्रवक्ता और वरिष्ठ नेता मृत्युंजय तिवारी ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है। अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए उन्होंने पार्टी नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जो राजद की आंतरिक स्थिति पर बड़े सवाल खड़े करते हैं।

​पार्टी में सम्मान नहीं मिलता

​इस्तीफा देते हुए मृत्युंजय तिवारी बेहद भावुक और आहत नजर आए। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि पिछले कुछ समय से उन्हें पार्टी के भीतर अपेक्षित सम्मान नहीं मिल रहा था। उन्होंने बताया कि इस उपेक्षा और अपनी पीड़ा के बारे में उन्होंने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व, विशेष रूप से नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को भी अवगत कराया था। हालांकि उनकी शिकायतों पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया और न ही स्थितियों में कोई सुधार हुआ।
​तिवारी ने आगे कहा कि बार-बार गुहार लगाने के बाद भी जब उन्हें लगा कि उनके स्वाभिमान और सुझावों का कोई महत्व नहीं रह गया है तो उनके पास पद त्यागने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा। उन्होंने कहा कि जिस पार्टी के लिए उन्होंने अपना सर्वस्व समर्पित किया वहां अब घुटन महसूस हो रही है।

​भविष्य की राजनीति पर संशय

​राजद के लिए यह इस्तीफा एक बड़ा नुकसान माना जा रहा है क्योंकि मृत्युंजय तिवारी पार्टी का एक बड़ा चेहरा थे और मीडिया में पार्टी का पक्ष मजबूती से रखते थे। फिलहाल उन्होंने किसी अन्य दल में शामिल होने की पुष्टि नहीं की है लेकिन उनके इस कदम ने बिहार की सियासी गलियारों में तरह-तरह की अटकलों को जन्म दे दिया है।
​क्या यह इस्तीफा आने वाले दिनों में राजद के लिए कोई बड़ी टूट की शुरुआत है? यह तो समय ही बताएगा लेकिन इतना तय है कि पार्टी के भीतर बढ़ती नाराजगी अब खुलकर सामने आ चुकी है।