मुजफ्फरपुर। नीट परीक्षा में धांधली और सॉल्वर गैंग के खिलाफ चल रही जांच में एक बड़ा खुलासा हुआ है। मुख्य आरोपी अर्पित सिंह और सॉल्वर विवेक कुमार की गिरफ्तारी के बाद उनके मोबाइल फोन से मिले डिजिटल साक्ष्यों ने जांच की दिशा बदल दी है। अब मुजफ्फरपुर के 14 परीक्षार्थी सीधे तौर पर जांच एजेंसियों के रडार पर हैं।

​पांच राज्यों में फैला है जाल

​जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि यह संगठित गिरोह केवल बिहार तक सीमित नहीं था। इसका नेटवर्क झारखंड, उत्तर प्रदेश और राजस्थान सहित कम-से-कम पांच राज्यों तक फैला हुआ था। मोबाइल रिकॉर्ड और चैट्स के जरिए यह पता चला है कि गिरोह ने परीक्षा से पहले 200 से अधिक अभ्यर्थियों से संपर्क साधा था।

​डिजिटल साक्ष्यों से खुल रही परतें

​एजेंसियां अब अभ्यर्थियों के परीक्षा रिकॉर्ड और उनकी संदिग्ध गतिविधियों की बारीकी से जांच कर रही हैं। बरामद मोबाइल फोन से डिलीट किए गए डेटा को रिकवर किया जा रहा है। कॉल डिटेल और चैट हिस्ट्री से बिचौलियों और एजेंटों के नाम सामने आ रहे हैं जो सीधे तौर पर इस गोरखधंधे में शामिल थे।

​कोचिंग संस्थानों और अभिभावकों की भूमिका संदिग्ध

​जांच का दायरा अब स्थानीय कोचिंग संस्थानों तक भी पहुंच गया है। एजेंसियों को शक है कि कुछ कोचिंग संचालक और एजेंट मिलकर संगठित तरीके से अनुचित लाभ दिलाने का काम कर रहे थे। इसके अलावा अभिभावकों की भूमिका की भी जांच की जा रही है कि क्या उन्होंने अपने बच्चों के लिए इस अवैध रास्ते का चुनाव किया था।

​वित्तीय लेन-देन पर एजेंसियों की नजर

​जांच का सबसे महत्वपूर्ण पहलू आर्थिक लेनदेन है। एजेंसियां 14 परीक्षार्थियों के बैंक खातों, यूपीआई ट्रांजेक्शन और अन्य वित्तीय लेनदेन का गहराई से विश्लेषण कर रही हैं। डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या परीक्षा में सेटिंग के लिए बड़ी रकम का आदान-प्रदान हुआ था।
​जांच अधिकारियों के अनुसार यदि ठोस सबूत मिलते हैं तो न केवल इन 14 परीक्षार्थियों पर बल्कि इसमें शामिल हर बिचौलिए, कोचिंग संचालक और दोषी अभिभावकों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। आने वाले दिनों में कई और लोगों को पूछताछ के लिए नोटिस जारी किए जाने की संभावना है। यह कार्रवाई नीट परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए एक बड़े कदम के रूप में देखी जा रही है।