मुजफ्फरपुर। पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है जो शादियों में बिन बुलाए मेहमान बनकर शिरकत करते थे और लाखों के गहनों-नकदी पर हाथ साफ कर देते थे। गिरोह का मास्टरमाइंड तरीका इतना शातिर था कि लोग उन्हें असली मेहमान समझकर उन पर शक तक नहीं करते थे।

​सूट-बूट में मेहमान बनकर करते थे रेकी

पकड़े गए आरोपियों में सीतामढ़ी के बेलसंड निवासी राजेश कुमार साह, उसका भाई अमित कुमार और उनके जीजा गोपाल साह शामिल हैं। आरोपी महंगे सूट-बूट और माथे पर चंदन का टीका लगाकर शादी समारोहों में घुसते थे। समारोह में शामिल होने के बाद वे सबसे पहले पूरे स्थल की रेकी करते थे। वे विशेष रूप से उन कमरों को निशाना बनाते थे जहां मेहमान अपने बैग और कीमती सामान रखते थे। मौका मिलते ही ये लोग बेखौफ होकर बैग खंगालते और नकदी-जेवर लेकर रफूचक्कर हो जाते थे।

​दो दिनों में 60 लाख की बड़ी वारदातों को दिया अंजाम

पुलिस के अनुसार इस गिरोह ने मुजफ्फरपुर में मात्र दो दिनों के भीतर बड़ी चोरियों को अंजाम दिया। 22 जून को मुजफ्फरपुर क्लब में एलएस कॉलेज की प्राचार्य प्रो. कनुप्रिया के बेटे के रिसेप्शन से उन्होंने 50 लाख रुपए के गहने और नकदी चुराए। इससे एक दिन पहले यानी 21 जून को अहियापुर थाना क्षेत्र के एक विवाह भवन से भी इन्होंने करीब 11 लाख रुपए के जेवर-नकदी उड़ाए थे।

​ज्वैलरी शॉप बनता था ठिकाना

गिरोह का एक सदस्य अमित कुमार सीतामढ़ी में अपनी ज्वैलरी दुकान चलाता था। चोरी का माल सीधे उसी दुकान पर पहुंचता था जहां जेवरातों को गलाकर ठिकाने लगाया जाता था। इतनी बड़ी रकम हाथ लगते ही आरोपियों ने सबसे पहले अपने सिर चढ़े पुराने कर्जों को उतारा। पूछताछ में सामने आया कि ये आरोपी पहले छोटी-मोटी चोरी (मोबाइल, पर्स) करते थे लेकिन इस बार उनका हाथ एक बड़े शिकार पर पड़ा।

​सीसीटीवी से खुली पोल

पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज खंगालकर संदिग्धों की पहचान की और नगर थाना क्षेत्र से उन्हें गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों की निशानदेही पर ज्वैलरी शॉप से चोरी किए गए जेवर बरामद कर लिए गए हैं। मुख्य आरोपी राजेश का पूर्व में भी आपराधिक इतिहास रहा है जिसमें 2014 का एक हत्या का मामला भी शामिल है। फिलहाल पुलिस अब इनके अन्य जिलों में फैले नेटवर्क और अन्य वारदातों की गहन छानबीन कर रही है।