वीरेंद्र कुमार/नालंदा। जिले में एक बार फिर परीक्षाओं में धांधली करने वाले गिरोह की सक्रियता को लेकर चर्चा में है। नालंदा पुलिस ने एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए नीट (NEET) परीक्षा में स्कॉलर बैठाकर परीक्षा पास कराने वाले एक अंतरजिला गिरोह का भंडाफोड़ किया है। इस कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि किस तरह मेधावी छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाला एक व्यवस्थित सिंडिकेट राज्य में जड़ें जमाए हुए है।
वाहन चेकिंग के दौरान हत्थे चढ़े जालसाज
इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत 2 मई की शाम को हुई, जब राजगीर डीएसपी सुनील कुमार सिंह के नेतृत्व में पावापुरी मोड़ के पास सघन वाहन चेकिंग अभियान चलाया जा रहा था। इसी दौरान पुलिस की नजर दो संदिग्ध लग्जरी गाड़ियों-एक स्कॉर्पियो और एक ब्रेजा पर पड़ी। पुलिस को देखते ही चालकों ने गाड़ियां भगाने की कोशिश की, जिससे पुलिस का शक गहरा गया। घेराबंदी कर जब दोनों वाहनों को रोका गया, तो तलाशी के दौरान स्कॉर्पियो से 2 लाख 95 हजार रुपये नकद बरामद हुए।
एमबीबीएस छात्र ही निकला गिरोह का मोहरा
गिरफ्तार किए गए तीन आरोपियों में से एक की पहचान अवधेश कुमार के रूप में हुई है, जो विम्स (VIMS) कॉलेज का एमबीबीएस छात्र है। एक मेडिकल छात्र का इस तरह के रैकेट में शामिल होना बेहद चौंकाने वाला है। अन्य आरोपियों में अमन कुमार सिंह और पंकज कुमार साह शामिल हैं। पुलिस ने इनके पास से तीन मोबाइल फोन भी जब्त किए हैं, जो इस काले कारोबार के सबसे बड़े सबूत साबित हुए हैं।
मोबाइल से खुले राज: कई परीक्षाओं में थी सेंध
जब पुलिस ने जब्त मोबाइल फोनों को खंगाला, तो उसमें नीट (NEET) के अलावा एईओ (AEO) और बीएसएनएल (BSNL) जैसी कई प्रतियोगी परीक्षाओं के एडमिट कार्ड मिले। इसके अलावा, व्हाट्सएप चैट में अभ्यर्थियों के साथ पैसों के लेन-देन और परीक्षा पास कराने की गारंटी वाले संदेशों की लंबी फेहरिस्त मिली है। यह गिरोह न केवल नीट, बल्कि अन्य सरकारी नौकरियों की परीक्षाओं में भी फर्जीवाड़ा करने का काम कर रहा था।
मास्टरमाइंड की तलाश और पुलिस की कार्रवाई
पूछताछ में यह बात सामने आई है कि इस पूरे नेटवर्क का मुख्य सरगना उज्जवल उर्फ राजा बाबू है। उज्जवल एक शातिर अपराधी है जिस पर पहले से कई मामले दर्ज हैं। वह फिलहाल फरार है, जिसकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है। पुलिस अब उन अभिभावकों और छात्रों की भी सूची तैयार कर रही है, जिन्होंने इस गिरोह को मोटी रकम देकर फर्जी तरीके से डॉक्टर बनने का सपना देखा था। फिलहाल पावापुरी थाने में मामला दर्ज कर जांच की जा रही है।
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