Odisha Desk, किओंझर: ओडिशा के किओंझर जिले स्थित प्रसिद्ध घटगांव माँ तारिणी पीठ के निकट बन रहा वन विभाग का ड्रीम ‘नेचर कैंप’ प्रोजेक्ट पहली ही बाढ़ में ताश के पत्तों की तरह ढह गया। वन विभाग की अदूरदर्शिता और लापरवाही के कारण सरकारी खजाने के लाखों रुपये पानी में बह गए हैं।
अटेई जंगल सफारी के बाद पर्यटकों को नदी किनारे रात्रि विश्राम का आनंद देने के उद्देश्य से वन विभाग द्वारा बैतरणी नदी के तट पर 5 नेचर कैंप और एक कैंटीन का निर्माण कराया जा रहा था। हालांकि, मानसून की शुरुआत में ही बैतरणी नदी में आई पहली बाढ़ के पानी में यह पूरा निर्माणाधीन प्रोजेक्ट जमींदोज हो गया। कैंप में रखे गए कीमती फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और निर्माण सामग्री नदी के तेज बहाव में बह गई।
निर्माण में घोर अनियमितता और धांधली का आरोप
इस घटना के बाद वन विभाग और संबंधित ठेकेदार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय बुद्धिजीवियों और ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण स्थल नदी का मुख्य जलग्रहण क्षेत्र होने की जानकारी के बावजूद विशेषज्ञों की सलाह लिए बिना लाखों रुपये खर्च कर दिए गए।
प्रोजेक्ट की शुरुआत से ही इस पर विवाद चल रहा था। निर्माण स्थल पर कोई अनिवार्य ‘सूचना बोर्ड’ तक नहीं लगाया गया था। कहने को तो काम ‘वन सुरक्षा समिति’ के नाम पर चल रहा था, लेकिन इसका वास्तविक संचालन एक गैर-ओड़िया ठेकेदार कर रहा था। बिना पिलर और बिना मेटलिंग के हो रहे अति-निम्न गुणवत्ता वाले निर्माण को लेकर स्थानीय मीडिया में पहले भी खबरें आई थीं, लेकिन वन विभाग के अधिकारियों ने इसे पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया।
अधिकारियों की चुप्पी और गैर-जिम्मेदाराना रवैया
घटना के बाद घटगांव रेंजर ने कोई भी बयान देने से इनकार कर दिया है। वहीं, डीएफओ (DFO) का कहना है कि नुकसान का आकलन किया जा रहा है। हैरान करने वाली बात यह है कि इतनी बड़ी तबाही के बाद भी डीएफओ उसी जोखिम भरे स्थान पर दोबारा नेचर कैंप बनाने की जिद्द पर अड़े हैं।
उठ रहे कई बड़े सवाल:
- किसके इशारे पर नियमों को दरकिनार कर किसी बाहरी ठेकेदार को यह काम दिया गया?
- नदी के मुहाने पर बिना पिलर के ऐसा कमजोर और घटिया निर्माण क्यों कराया गया?
- सरकारी पैसे के इस भारी नुकसान के लिए कौन जिम्मेदार है और इसकी भरपाई कौन करेगा?
- अगर पर्यटकों के रुकने के दौरान बाढ़ आती, तो होने वाली जनहानि की जिम्मेदारी किसकी होती?
- सरकारी धन की इस बर्बादी को लेकर अब स्थानीय स्तर पर इस पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच की मांग तेज हो गई है।
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