राष्ट्रीय पात्रता सह-प्रवेश परीक्षा (नीट यूजी) 2026 के परीक्षा परिणामों में चंडीगढ़ के प्रतिभावान छात्रों ने देश स्तर पर शीर्ष 100 में स्थान प्राप्त किया है। इन सफल अभ्यर्थियों ने आगामी मेडिकल काउंसिलिंग से पहले अपनी पढ़ाई के अनूठे तरीकों और समय प्रबंधन को लेकर महत्वपूर्ण टिप्स साझा किए हैं।
पंचकूला। राष्ट्रीय पात्रता सह-प्रवेश परीक्षा (नीट) यूजी-2026 के नतीजे घोषित होने के बाद सफल अभ्यर्थियों में भारी उत्साह देखा जा रहा है। प्रश्नपत्र लीक होने की वजह से दोबारा आयोजित हुई इस परीक्षा में देश भर के विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। इस कड़ी में चंडीगढ़ के कई होनहारों ने अखिल भारतीय स्तर पर शीर्ष 100 (टॉप-100) में अपनी जगह सुरक्षित की है। एलेन कोचिंग संस्थान से शिक्षा ग्रहण कर सफलता का परचम लहराने वाले इन मेधावी छात्रों ने अपने परीक्षा दृष्टिकोण, अध्यापकों के सहयोग और स्वाध्याय (सेल्फ स्टडी) की रणनीतियों को विस्तार से साझा किया है।
सही नियोजन है आवश्यक
चंडीगढ़ क्षेत्र में पहला स्थान हासिल करने वाले माधवन महाजन ने अखिल भारतीय स्तर पर 44वीं रैंक (AIR-44) प्राप्त की है। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय समय आधारित पढ़ाई के बजाय सटीक कार्ययोजना को क्रियान्वित करने को दिया। माधवन के अनुसार, छात्र को अपने दैनिक लक्ष्यों की लिखित या मानसिक रूप से स्पष्ट रूपरेखा तैयार कर उस पर निरंतर काम करना चाहिए। उन्होंने बताया कि जीव विज्ञान (बायोलॉजी) उनके लिए अपेक्षाकृत कठिन था, लेकिन शिक्षकों के मार्गदर्शन और निरंतर प्रश्न अभ्यास से उन्होंने इस पर नियंत्रण पाया।
अभ्यास और निरंतरता का महत्व
परीक्षा में देश भर में 66वां स्थान (AIR-66) पाकर चंडीगढ़ में दूसरे स्थान पर रहे हर्शुल गर्ग ने अपने दो वर्षीय कोचिंग अनुभव को साझा किया। वे रोजाना पांच घंटे संस्थान में और पांच घंटे घर पर स्व-अध्ययन करते थे। हर्शुल ने अपनी तैयारी के दौरान एक भी मॉक टेस्ट नहीं छोड़ा, जिसे वे अपनी सफलता का सबसे बड़ा आधार मानते हैं। उन्होंने बताया कि शिक्षकों द्वारा सुझाई गई चुनिंदा पुस्तकों और व्यक्तिगत संदेह निवारण (डाउट क्लियरेंस) सत्रों ने उनकी राह को बेहद आसान बना दिया।
तनाव से दूरी जरूरी
अखिल भारतीय स्तर पर 29वीं रैंक (AIR-29) अर्जित करने वाली आशी गोयल ने बताया कि उनका मुख्य ध्यान घंटों की गिनती करने के बजाय दैनिक लक्ष्यों को प्राप्त करने पर रहता था। पढ़ाई के दौरान मानसिक थकान होने पर वे 10 मिनट की छोटी झपकी (नेप) लेती थीं, जिससे ऊर्जा का स्तर दोबारा बढ़ जाता था। भौतिक विज्ञान और रसायन विज्ञान (फिजिक्स-कैमिस्ट्री) के विषय में उन्होंने अधिक से अधिक संख्यात्मक प्रश्नों के अभ्यास को जरूरी बताया, जबकि जीव विज्ञान के लिए उन्होंने बार-बार दोहराने और मुख्य बिंदुओं को लिखकर याद करने की सलाह दी। उन्होंने यह भी कहा कि परीक्षा के दौर में आत्मविश्वास बनाए रखना और अभिभावकों से संवाद करना अत्यंत आवश्यक है।
योजनाबद्ध पुनरावृत्ति से लाभ
70वीं रैंक (AIR-70) हासिल करने वाले समर्थ ने बताया कि वे सुबह के वक्त प्रश्नों को हल करने और शाम के समय सिद्धांतों (थ्योरी) को पढ़ने की योजना पर काम करते थे। उन्होंने जीव विज्ञान के विस्तृत पाठ्यक्रम के लिए एनसीईआरटी (NCERT) की पुस्तकों के गहन अध्ययन और बार-बार दोहराव को सफलता की कुंजी बताया। समर्थ के अनुसार, परीक्षा के बदलते स्तर को देखते हुए हर विषय के कठिन प्रश्नों का अभ्यास करना लाभदायक रहता है। इस शानदार परिणाम के बाद जहां विद्यार्थियों को अपने पसंदीदा चिकित्सा महाविद्यालयों (मेडिकल कॉलेजों) में दाखिले की प्रतीक्षा है, वहीं उनके माता-पिता बच्चों की इस स्वर्णिम सफलता पर फूले नहीं समा रहे हैं।

