कुंदन कुमार/ पटना। बिहार की राजनीति में अपनी सक्रियता के लिए पहचाने जाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज एक बार फिर सभी को चौंका दिया। वे अचानक पटना स्थित जनता दल यूनाइटेड (JDU) के प्रदेश कार्यालय पहुंचे। यह दौरा सामान्य नहीं था क्योंकि वहां का नजारा कुछ अलग ही था।
क्या था आज का कार्यक्रम?
JDU कार्यालय में हर दिन जनसुनवाई का आयोजन होता है, जिसका उद्देश्य आम जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान करना है। आज के कार्यक्रम के लिए पूर्व मुख्यमंत्री के पुत्र निशांत कुमार के साथ-साथ मंत्री दामोदर रावत और रत्नेश सदा की ड्यूटी लगाई गई थी। यह एक नियमित प्रक्रिया थी, जिसमें जनता अपनी पीड़ा लेकर पहुंचती है।
खाली दिखीं कुर्सियां, नीतीश कुमार ने संभाला मोर्चा
जब नीतीश कुमार औचक निरीक्षण के लिए पहुंचे तो वहां का दृश्य देखकर वे हैरान रह गए। तय कार्यक्रम के बावजूद मौके पर कोई भी मंत्री मौजूद नहीं था। कार्यालय में मंत्रियों की अनुपस्थिति ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया।
स्थिति को भांपते हुए नीतीश कुमार ने खुद ही कमान अपने हाथों में ले ली। वे सीधे कर्पूरी सभागार पहुंचे और वहां मौजूद लोगों की समस्याओं को ध्यानपूर्वक सुनने लगे। पूर्व मुख्यमंत्री को अपने बीच पाकर फरियादी भी उत्साहित दिखे। वे एक-एक कर लोगों की बात सुनते रहे और संबंधित अधिकारियों को समाधान के लिए जरूरी निर्देश भी दिए।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा
पूर्व मुख्यमंत्री का यह कदम संदेश देने के लिए काफी है कि वे काम में लापरवाही कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे। मंत्रियों के गायब होने और नीतीश कुमार द्वारा खुद जनसुनवाई करने की खबर जंगल की आग की तरह फैल गई। यह घटना पार्टी के भीतर एक सख्त संकेत के रूप में देखी जा रही है। जहां एक ओर इसे नीतीश कुमार की जनता के प्रति प्रतिबद्धता माना जा रहा है, वहीं दूसरी ओर कैबिनेट सहयोगियों के लिए यह एक कड़ा सबक भी है।
इस घटनाक्रम ने राज्य के प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है कि आखिर जिम्मेदारी सौंपने के बावजूद मंत्री क्यों नदारद थे। फिलहाल पूर्व मुख्यमंत्री की इस सक्रियता ने विपक्ष के सामने भी पार्टी की अनुशासन वाली छवि को फिर से जीवंत कर दिया है।

