हरियाणा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राव नरेंद्र के भिवानी आगमन पर एनएसयूआई कार्यकर्ताओं द्वारा उनका स्वागत किया गया। इस दौरान छात्र हितों, शिक्षा व्यवस्था में सुधार, परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और छात्र आंदोलनों की विभिन्न मांगों पर विस्तृत चर्चा हुई।
अजय सैनी, भिवानी। देशभर में शिक्षा, सामाजिक न्याय, पारदर्शी परीक्षा प्रणाली और छात्र अधिकारों को लेकर चल रहे संघर्ष के बीच हरियाणा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राव नरेंद्र के भिवानी आगमन पर एनएसयूआई भिवानी की ओर से उन्हें शिक्षा, समानता और सामाजिक न्याय के अमर प्रतीक भारत रत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर, क्रांतिज्योति माता सावित्रीबाई फुले एवं महात्मा ज्योतिराव फुले की प्रतिमाएं भेंट कर सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर पूर्व छात्र नेता उमेश भारद्वाज, टीम राजबीर फर्टिया वरिष्ठ कांग्रेस नेतागण तथा एनएसयूआई भिवानी व कांग्रेस के कार्यकर्ता उपस्थित रहे। प्रतिनिधिमंडल ने छात्र हितों, शिक्षा व्यवस्था में सुधार, परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और संविधान के मूल्यों की रक्षा को लेकर विस्तृत चर्चा की।
छात्रों की आवाज लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत
इस मौके पर हरियाणा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राव नरेंद्र ने कहा कि देश के युवाओं और छात्रों की आवाज़ लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा कि शिक्षा किसी भी राष्ट्र की नींव होती है और यदि छात्रों के साथ अन्याय होता है तो उसकी आवाज़ उठाना हर जनप्रतिनिधि का कर्तव्य है। कांग्रेस पार्टी छात्रों के संवैधानिक अधिकारों, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सामाजिक न्याय के लिए निरंतर संघर्ष करती रहेगी।
सड़क से संसद तक छात्र हितों की लड़ाई
एनएसयूआई जिला अध्यक्ष मंजीत लांगायन ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ के नेतृत्व में देशभर के छात्रों की आवाज़ को लगातार सड़क से संसद तक मजबूती से उठाया गया। यही कारण है कि छात्र हितों के मुद्दे आज राष्ट्रीय चर्चा का विषय बने हैं।
उन्होंने कहा कि भिवानी में एनएसयूआई ने छात्र हितों के लिए लगातार संघर्ष किया। शिक्षा मंत्री के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किए गए, परीक्षा व्यवस्था और शिक्षा संबंधी मुद्दों पर अनेक आंदोलन आयोजित किए गए तथा 17 जुलाई को हरियाणा के जींद में प्रधानमंत्री के कार्यक्रम के दौरान छात्रों की समस्याओं से अवगत कराने का प्रयास किया गया, जहां पुलिस ने एनएसयूआई कार्यकर्ताओं को हिरासत में भी लिया। इसके अतिरिक्त दिल्ली के जंतर-मंतर पर आंदोलनरत छात्रों के समर्थन में भिवानी में राष्ट्रीय ध्वज के नीचे लगातार तीन दिन तक भूख हड़ताल आयोजित की गई।
ठोस सुधारों की आवश्यकता पर जोर
मंजीत लांगायन ने कहा कि हाल के घटनाक्रमों के बाद यह स्पष्ट है कि छात्र लगातार जवाबदेही और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि पेपर लीक, परीक्षा अनियमितताओं और शिक्षा संबंधी विवादों ने लाखों युवाओं के भविष्य को प्रभावित किया है।
इसलिए अब समय केवल आश्वासनों का नहीं, बल्कि ठोस सुधारों का है ताकि हर विद्यार्थी का भविष्य सुरक्षित रह सके। उन्होंने कहा कि एनएसयूआई किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि देश के प्रत्येक छात्र के अधिकार, सम्मान और भविष्य की रक्षा के लिए संघर्ष कर रही है। जब तक छात्रों को न्याय नहीं मिलेगा, तब तक यह आंदोलन लोकतांत्रिक तरीके से जारी रहेगा।
एनएसयूआई ने रखी प्रमुख मांगे
इस दौरान एनएसयूआई ने मांग उठाई कि:
- छात्र आंदोलनों के दौरान जान गंवाने वाले प्रत्येक छात्र के परिवार को एक करोड़ का मुआवजा दिया जाए।
- 20 जुलाई को जंतर-मंतर सहित विभिन्न छात्र आंदोलनों के दौरान छात्रों पर दर्ज सभी मुकदमे तत्काल वापस लिए जाएं।
- पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं के सभी मामलों की निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए।
- शिक्षा नीति और परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार कर इसे पारदर्शी, छात्र-केंद्रित और समान अवसर आधारित बनाया जाए।
- छात्र आंदोलनों के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाए तथा शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों के साथ दमनात्मक कार्रवाई न हो।
- शिक्षा पर खर्च बढ़ाया जाए तथा सरकारी शिक्षण संस्थानों को अधिक मजबूत बनाया जाए।


