भुवनेश्वर: सामाजिक ताने-बाने की झिझक हो या जेब की तंगी, कोई भी युवा अब अपनी उच्च शिक्षा अधूरी छोड़ने पर मजबूर नहीं होगा। ओडिशा सरकार ने HIV से प्रभावित परिवारों और खुद इस बीमारी से जूझ रहे छात्रों का हाथ थामने के लिए एक बेहद संवेदनशील और जरूरी पहल की है। ओडिशा राज्य एड्स नियंत्रण समिति (OSACS) और उच्च शिक्षा विभाग ने साथ मिलकर यह सुनिश्चित करने की ठानी है कि ऐसे हर जरूरतमंद छात्र तक राज्य सरकार की छात्रवृत्ति योजना का फायदा बिना किसी रुकावट के पहुंचे।
हाल ही में OSACS के प्रोजेक्ट डायरेक्टर डॉ. अक्षय कुमार शतपथी और उच्च शिक्षा निदेशक कालीप्रसन्न महापात्र के बीच हुई अहम बैठक में इस पूरी रूपरेखा को अंतिम रूप दिया गया। इस पूरी मुहिम की धुरी है, राज्य सरकार की ‘गोपबंधु शिक्षा सहायता योजना’ (GSSY), जिससे इन छात्रों को सीधा जोड़ा जाएगा।

इस योजना का सीधा मकसद छात्रों को पढ़ाई के खर्च की चिंता से मुक्त करना है। स्नातक (UG) और स्नातकोत्तर (PG) की पढ़ाई कर रहे योग्य छात्रों को योजना के तहत हर साल 20,000 रुपये की आर्थिक मदद दी जाएगी।
यह सहायता उन बच्चों के लिए होगी जिनके माता-पिता एचआईवी/एड्स से पीड़ित हैं, या फिर वे छात्र जो स्वयं इस स्थिति से गुजर रहे हैं। यह राशि उनकी किताबों, स्टेशनरी, आने-जाने के किराए और कॉलेज की अन्य फीस को पूरा करने में काफी मददगार साबित होगी।
सरकारी मुलाकातों और कागजी योजनाओं से इतर, जमीनी हकीकत यह भी है कि लोग अक्सर जानकारी के अभाव या समाज के डर से सामने आने से कतराते हैं। अधिकारियों ने भी इस बात को माना कि इसी जागरूकता की कमी की वजह से कई पात्र छात्र अब तक इस मदद से दूर रह गए थे।
अब इस खाई को पाटने के लिए OSACS से जुड़े सेवा केंद्र और जमीनी स्तर पर काम करने वाले सामाजिक संगठन सीधे लोगों के बीच जाएंगे। इसके साथ ही, कॉलेजों में बने ‘रेड रिबन क्लब’ (RRC) न केवल छात्रों को इस स्कॉलरशिप की जानकारी देंगे, बल्कि परिसरों में एक ऐसा अपनापन भरा माहौल बनाएंगे जहां बिना किसी भेदभाव के ये बच्चे खुलकर अपनी पढ़ाई पूरी कर सकें।
ओडिशा सरकार की यह कोशिश सिर्फ एक आर्थिक मदद नहीं है, बल्कि उन युवाओं को यह भरोसा दिलाने का जरिया है कि समाज और सरकार उनके साथ खड़ी है।
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