भुवनेश्वर: ओडिशा सरकार ने राज्यभर में जनगणना कार्य में लगे अधिकारियों और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) पेश करने का निर्णय लिया है। यह कदम क्षेत्र में काम करने वाले कर्मियों पर हाल ही में हुए हमलों और भीषण गर्मी (हीटवेव) के कारण उनके स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों की रिपोर्टों के बाद उठाया गया है।

हमलों और स्वास्थ्य जोखिमों पर चिंता राजस्व मंत्री सुरेश पुजारी ने इस महत्वपूर्ण निर्णय की घोषणा करते हुए कहा कि वर्तमान में घर-घर जाकर जनगणना करना एक बड़ी चुनौती बन गया है। उन्होंने बताया कि फील्ड वर्करों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। कुछ क्षेत्रों में जनगणना कर्मियों पर शारीरिक हमलों की खबरें आई हैं। ओडिशा में जारी अत्यधिक तापमान के कारण कई कर्मचारी ड्यूटी के दौरान बीमार पड़ गए हैं।

मंत्री पुजारी ने स्पष्ट किया कि सरकार अपने कर्मचारियों और नागरिकों दोनों की सुरक्षा के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए उन्होंने गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक (DGP) के साथ उन क्षेत्रों के बारे में विस्तृत चर्चा की है जहां हिंसा की घटनाएं दर्ज की गई है।

मंत्री ने कड़ा संदेश देते हुए कहा कि जनगणना कर्मियों पर हमला करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। प्रशासन हमलावरों का पता लगाएगा और उन्हें गिरफ्तार करेगा, भले ही वे कहीं भी छिपे हों। इसके साथ ही, लू की स्थिति को एक गंभीर चिंता का विषय बताते हुए उन्होंने अधिकारियों के साथ बैठक की है, ताकि फील्ड स्टाफ के लिए कार्य परिस्थितियों को सुरक्षित बनाया जा सके।

जल्द ही जारी होने वाले विस्तृत दिशा-निर्देशों (SOP) में निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

  • सुरक्षा प्रोटोकॉल: संवेदनशील इलाकों में पुलिस सुरक्षा और बेहतर समन्वय।
  • आपातकालीन प्रतिक्रिया: किसी भी अप्रिय घटना या स्वास्थ्य समस्या की स्थिति में तत्काल सहायता उपलब्ध कराना।
  • गर्मी से बचाव: लू से बचने के लिए कार्य समय में बदलाव और आवश्यक चिकित्सा किट की उपलब्धता।
  • विभागीय समन्वय: राजस्व, पुलिस और स्वास्थ्य विभागों के बीच बेहतर तालमेल ताकि जनगणना कार्य बिना किसी बाधा के संपन्न हो सके।

इस पहल का मुख्य उद्देश्य जनगणना कार्यों को सुचारू रूप से चलाना और यह सुनिश्चित करना है कि राज्य का कोई भी कर्मचारी शारीरिक हानि या स्वास्थ्य जोखिम का शिकार न हो। सरकार का यह कदम फील्ड वर्करों के मनोबल को बढ़ाने और डेटा संग्रह की प्रक्रिया को सुरक्षित बनाने की दिशा में एक प्रभावी प्रयास माना जा रहा है।