भुवनेश्वर: ओडिशा सरकार ने VHP नेता स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती से जुड़े मामलों को लेकर एक साथ तीन बड़े फैसले लिए हैं, जिससे राज्य की राजनीति में नया भूचाल आ गया है। एक तरफ गायब हुई ‘नायडू कमीशन रिपोर्ट’ की जांच क्राइम ब्रांच को सौंपी गई है, वहीं दूसरी तरफ स्वामी सरस्वती की स्मृति को अमर बनाने के लिए फुलबानी मेडिकल कॉलेज का नामकरण उनके नाम पर करने और जलेशपेटा आश्रम के लिए 13 करोड़ रुपए के अनुदान की घोषणा की गई है।

नायडू कमीशन रिपोर्ट गायब होने के मामले में डेढ़ महीने की पुलिस जांच के बाद भी जब कोई ठोस सफलता नहीं मिली, तो मामला क्राइम ब्रांच को सौंप दिया गया। मोहन सरकार को पिछले साल अक्टूबर में ही पता चला था कि मुख्यमंत्री कार्यालय से रिपोर्ट से जुड़ी फाइलें गायब हैं।

सरकार को 2 साल बाद क्यों आई स्वामी लक्ष्मणानंद की याद : बीजद

इस संबंध में पूर्व मुख्यमंत्री और मौजूदा नेता प्रतिपक्ष नवीन पटनायक से स्पष्टीकरण मांगा गया था। जवाब संतोषजनक न होने पर 10 जून को कैपिटल थाने में FIR दर्ज कराई गई थी। अचानक हुई इस बड़ी कार्रवाई के बाद बीजद ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं। बीजद का कहना है कि सरकार को 2 साल बाद स्वामी लक्ष्मणानंद की याद क्यों आई? क्या यह सम्मान है या कोई बड़ी राजनीतिक रणनीति?

भाजपा ने पूर्व सरकार पर साधा निशाना

इसके जवाब में भाजपा (BJP) ने कड़ा पलटवार करते हुए कहा कि पिछली सरकार ने इतने सालों तक इस संवेदनशील मामले पर पर्दा डालने का काम किया, जबकि वर्तमान सरकार सच्चाई को सामने लाने और स्वामी लक्ष्मणानंद को उचित सम्मान देने के लिए प्रतिबद्ध है।

इस पूरे घटनाक्रम पर जलेशपेटा आश्रम की संपादिका ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वास्तविक सम्मान स्वामी लक्ष्मणानंद को तब मिलेगा जब उनकी निर्मम हत्या करने वाले दोषियों को कानून द्वारा सख्त सजा दी जाएगी।

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