नई दिल्ली/भुवनेश्वर: ओडिशा की राजनीति का केंद्र इन दिनों देश की राजधानी दिल्ली बना हुआ है। राजनीति इस समय भुवनेश्वर से ज्यादा दिल्ली के गलियारों में सुर्ख़ियों में बनी हुई है। वजह साफ है, राज्य के तीनों प्रमुख राजनीतिक दलों के दिग्गज नेता इस वक्त राजधानी में डेरा डाले हुए हैं। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक और कांग्रेस अध्यक्ष भक्त चरण दास की एक साथ दिल्ली में मौजूदगी ने सियासी गलियारों की हलचल को अचानक काफी बढ़ा दिया है।

जानें हाई-प्रोफाइल दौरों के पीछे की मुख्य वजहें

मोहन चरण माझी (भाजपा): मुख्यमंत्री पिछले तीन दिनों से दिल्ली में हैं। केंद्रीय जल शक्ति सम्मेलन में हिस्सा लेने के अलावा उनका यह दौरा राजनीतिक रूप से बेहद अहम है। राज्य में खनन और खनिज विकास अधिनियम (MMDR) संशोधन को लेकर विपक्षी हमलों का सामना कर रही सरकार के लिए यह केंद्रीय नेतृत्व से विचार बिमर्श करने का सही वक्त है। इसके अलावा, ओडिशा लौटते ही प्रस्तावित भाजपा राज्य कार्यकारिणी की बैठक से पहले इस दौरे को सांगठनिक फैसले से जोड़कर देखा जा रहा है।

नवीन पटनायक (बीजेडी): हालांकि इसे उनका निजी दौरा बताया जा रहा है, लेकिन 7 दिनों का यह लंबा प्रवास कई सवाल खड़े कर रहा है। एमएमडीआर एक्ट संशोधन पर भाजपा सरकार को घेरने की रणनीति बना रही बीजेडी के सुप्रीमो का वरिष्ठ नेताओं और कानूनी विशेषज्ञों से मिलना पार्टी के अगले कदम की ओर इशारा करता है।

भक्त चरण दास (कांग्रेस): पीसीसी चीफ इन दिनों एआईसीसी के शीर्ष नेताओं के साथ लगातार बैठकों में व्यस्त हैं। आगामी पंचायत चुनावों को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस संगठन में फेरबदल और नई टीम के ऐलान पर मुहर लगवाने के लिए यह दिल्ली दौरा बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

कुल मिलाकर, इन तीनों नेताओं की एक साथ राजधानी में मौजूदगी इस बात का संकेत है कि ओडिशा लौटने के बाद राज्य की राजनीति में कुछ बड़े राजनीतिक और संगठनात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

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