साइबर अपराध के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए गुजरात पुलिस ने ‘ऑपरेशन म्यूल हंट 1.0’ के तहत एक विशाल साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। इस विशेष अभियान में पुलिस ने 2289 करोड़ रुपये की आर्थिक ठगी का खुलासा किया है और 638 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। अभियान का मुख्य उद्देश्य साइबर अपराधियों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे म्यूल अकाउंट नेटवर्क को ध्वस्त करना और आम नागरिकों की मेहनत की कमाई को सुरक्षित रखना था।

राज्यव्यापी अभियान के जरिए साइबर नेटवर्क पर बड़ा प्रहार

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन और गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी के नेतृत्व में गुजरात पुलिस ने पूरे राज्य में समन्वित अभियान चलाया। गुजरात पुलिस के साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CCE) की निगरानी में सभी पुलिस आयुक्तालयों, रेंज कार्यालयों, लोकल क्राइम ब्रांच और साइबर पुलिस स्टेशनों को इस अभियान से जोड़ा गया।

अभियान का केंद्र बिंदु उन म्यूल अकाउंट्स की पहचान और कार्रवाई थी, जिनका इस्तेमाल साइबर अपराधी ठगी की रकम को छिपाने, ट्रांसफर करने और मनी लॉन्ड्रिंग के लिए करते हैं। ऐसे खातों के धारकों को ‘मनी म्यूल’ कहा जाता है। कई बार लोग लालच या अज्ञानता में अपने बैंक खाते अपराधियों को उपलब्ध करा देते हैं, जिससे वे अपराध की कड़ी का हिस्सा बन जाते हैं।

डेटा इंटेलिजेंस और तकनीक के दम पर बड़ी सफलता

गुजरात पुलिस ने भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C), राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP), समन्वय पोर्टल और 1930 हेल्पलाइन से प्राप्त सूचनाओं का गहन विश्लेषण किया। डेटा इंटेलिजेंस और तकनीकी निगरानी की मदद से संदिग्ध खातों तथा साइबर अपराधियों की पहचान कर उनके खिलाफ सटीक कार्रवाई की गई।

अभियान के दौरान प्रत्येक जिले में नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की गई, जबकि शिकायतों के त्वरित निस्तारण और जांच को गति देने के लिए विशेष सहायता टीमों का गठन किया गया। इसके साथ ही बैंकों के साथ रियल-टाइम डेटा शेयरिंग व्यवस्था स्थापित की गई, जिससे संदिग्ध लेनदेन पर तत्काल नजर रखी जा सकी।

ऑपरेशन म्यूल हंट 1.0 की प्रमुख उपलब्धियां

अभियान के दौरान:

  • 565 एफआईआर दर्ज की गईं।
  • 638 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
  • 193 म्यूल अकाउंट्स पर कार्रवाई की गई।
  • 4052 साइबर अपराध मामलों की पहचान हुई, जिनमें से 491 मामले गुजरात से जुड़े पाए गए।
  • कुल 2289 करोड़ रुपये की वित्तीय धोखाधड़ी का खुलासा हुआ।

बैंकिंग लेनदेन में दिखा अभियान का असर

गुजरात पुलिस के अनुसार इस कार्रवाई का प्रभाव बैंकिंग गतिविधियों में भी स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। चेक के माध्यम से होने वाली निकासी में लगभग 75 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। मासिक चेक विड्रॉल की राशि 126 करोड़ रुपये से घटकर 25 करोड़ रुपये रह गई, जो करीब 80 प्रतिशत की गिरावट दर्शाती है।

इसके अलावा, अगस्त से दिसंबर 2025 के बीच पहली लेयर के म्यूल अकाउंट्स यानी वे खाते जिनमें ठगी की रकम सबसे पहले जमा होती है की संख्या में 30 प्रतिशत की कमी आई। वहीं सितंबर से दिसंबर 2025 के दौरान एटीएम के जरिए नकद निकासी में 66 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

AI आधारित निगरानी से और मजबूत होगी साइबर सुरक्षा

साइबर अपराध पर और प्रभावी नियंत्रण के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के मार्गदर्शन में इंडियन डिजिटल पेमेंट इंटेलिजेंस कॉर्पोरेशन (IDPIC) जल्द ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित रिस्क स्कोरिंग सिस्टम लागू करेगा। इस प्रणाली के तहत प्रत्येक वित्तीय लेनदेन को लो रिस्क, मीडियम रिस्क और हाई रिस्क श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाएगा।

इसके साथ ही Mulehunter.ai नामक एक विशेष रजिस्ट्री विकसित की गई है, जो बैंकों के बीच संदिग्ध खातों की जानकारी साझा करने में मदद करेगी। इससे साइबर अपराधियों की पहचान और उनके खिलाफ कार्रवाई पहले से कहीं अधिक तेज और प्रभावी हो सकेगी।

साइबर अपराध के खिलाफ गुजरात मॉडल

‘ऑपरेशन म्यूल हंट 1.0’ ने यह साबित कर दिया है कि डेटा इंटेलिजेंस, आधुनिक तकनीक, बैंकिंग सहयोग और एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय के जरिए साइबर अपराध के जटिल नेटवर्क को भी ध्वस्त किया जा सकता है। गुजरात पुलिस की यह कार्रवाई देशभर में साइबर अपराध नियंत्रण के लिए एक प्रभावी मॉडल के रूप में देखी जा रही है।

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