कॉमनवेल्थ समिट में शामिल होने से पहले ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने बड़ा बयान दिया है। प्रधानमंत्री एंडी ने कहा है कि ट्रांस अटलांटिक स्वेल ट्रेड यानी गुलामों के व्यापार को लेकर वह खुले मन से माफी मांगने को तैयार हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इसके लिए वह कोई भी मुआवजा नहीं चुकाएंगे। ‘द गार्डियन’ में लेख के माध्यम से यूके के प्रधानमंत्री ने यह बात कही है। जानकारी होकि, कॉमनवेल्थ उन देशों के समूह को कहा जाता है जिनपर एक समय ब्रिटेन ने राज किया था।

क्या बोले प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम

प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने समिट में हिस्सा लेने से पहले कहा कि उन्हें लोगों के उस दर्द का एहसास है जो कि उन्होंने झेला है। इसका उन्हें बहुत दुख है। एंडी ने कहा कि पहले जो भी क्रूरता की गई है उसकी छाप अभी मिटी नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि मुआवजा बांटना इसका कोई समाधान नहीं है। यह एक अत्याचार के बदले दूसरी तरह का अत्याचार ही कहा जाएगा। क्योंकि ब्रिटेन के आज के लोगों को इन घटनाओं का जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।

बता दें कि, इस समय ब्रिटेन के किंग चार्ल्स कैरेबियन देशों के दौरे पर निकले हैं। चार्ल्स ने बहामास में भी गुलामी का जिक्र किया था और ब्रिटेन के शासनकाल में मारे गए लगों को श्रद्धांजलि दी थी। अब तक ब्रिटेन की ओर से कभी इस तरह की माफी नहीं मांगी गई। हालांकि इस मुद्दे की संवेदनशीलता को देखते हुए अब ब्रिटेन ने माफी मांगनी ही ठीक समझा।

ब्रिटेन का कहना है कि इस बात से इनकार नहीं किया जा सता कि गुलामों के व्यापार से उसने पैसा कमाया लेकिन बाद में इसे बंद करने में भी उसने भूमिका निभाई। 1833 में ब्रिटेन की संसद ने गुलामी को गैरकानूनी घोषित किया था। संसद में इस तरह का प्रस्ताव पास होने के बाद भी ब्रिटेन ने दूसरे देशों पर राज करना नहीं छोड़ा और उनका शोषण करता रहा।

जल्द भारत आ सकते हैं बर्नहम

टिश प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम भारत का दौरा करने के इच्छुक हैं और जल्द ही उनकी यात्रा हो सकती है। एक शीर्ष राजनयिक ने बृहस्पतिवारक को दोनों देशों के बीच बढ़ती साझेदारी का उल्लेख करते हुए यह जानकारी दी। भारत में कार्यवाहक ब्रिटिश उच्चायुक्त बेन मेलर ने यहां ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि पदभार संभालने के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ बातचीत के दौरान, बर्नहम ने भारत आने की अपनी इच्छा जताई थी। मेलर ने कहा, ”मुझे पता है कि एंडी बर्नहम भारत आने के लिए बहुत उत्सुक हैं।”

उन्होंने कहा, ”जब बर्नहम ने प्रधानमंत्री का पद संभाला था, उसके तुरंत बाद उनकी प्रधानमंत्री मोदी से बातचीत हुई थी और उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के सामने सीधे तौर पर यह बात रखी थी। मुझे यकीन है कि हम जल्द ही ऐसा होता हुआ देख पाएंगे।”

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Delhi 13 Year Old Boy Kidnapped: दिल्ली में 13 साल के बच्चे का किडनैप हो गया था। हालांकि दिल्ली पुलिस (Delhi Police) ने 3 घंटे के अंदर मामले को सुलझाते हुए बच्चे को छुड़ा लिया। साथ ही आरोपी को भी गिरफ्तार कर लिया है। हालांकि अपहण से ज्यादा पुलिस ने जिस तरीके से कार्रवाई करते हुए बच्चे को बरामद किया, उसकी चर्चा हो रही है। दिल्ली पुलिस ने आरोपी को 5 हजार रुपए की यूपीआई पेमेंट की। इससे आरोपी का लोकेशन पुलिस को पता चल गया और उसे दबोच लिया। पुलिस ने आरोपी के पास से वारदात में इस्तेमाल स्कूटी और मोबाइल फोन के साथ 5 हजार रुपये भी बरामद कर लिया है।

पुलिस के मुताबिक, 30 अक्तूबर की शाम करीब 7:14 बजे ज्योति नगर थाने को 13 साल के बच्चे के लापता होने की सूचना मिली थी। बच्चे की मां ने बताया कि उनका बेटा कुछ सामान खरीदने के लिए घर से निकला था, लेकिन वापस नहीं लौटा।

इसी बीच एक अनजान नंबर से फोन आया और बेटे को सुरक्षित छोड़ने के बदले 40 हजार रुपये की फिरौती मांगी गई।मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत जांच शुरू की। इंस्पेक्टर प्रवेश कसाना के नेतृत्व में टीम गठित की गई। पुलिस ने आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली और तकनीकी निगरानी के जरिए आरोपी तक पहुंचने की कोशिश शुरू की। जांच के दौरान अपहरणकर्ता ने दोबारा फोन कर फिरौती मांगी। उसने नकद रकम लेने के बजाय यूपीआई के जरिए पैसे भेजने को कहा और एक बारकोड शेयर किया। आरोपी को पकड़ने के लिए एक पुलिसकर्मी के खाते से उस बारकोड पर 5 हजार रुपये ट्रांसफर किए गए। जांच में पुलिस को पता चला कि करावल नगर थाना क्षेत्र में एक साइबर कैफे के यूपीआई बारकोड के जरिए रकम प्राप्त की गई थी। कैफे संचालक सुनील सैनी ने पुलिस को बताया कि करीब 21-22 साल का एक युवक नाबालिग बच्चे के साथ वहां आया था। उसने 50 रुपये कमीशन देने के बदले कैफे के यूपीआई बारकोड से 5 हजार रुपये प्राप्त किए थे।

इस तरह आरोपी को गिरफ्तार किया

पुलिस ने कैफे की सीसीटीवी फुटेज देखी तो शिकायतकर्ता ने उसमें अपने बेटे की पहचान कर ली। आरोपी तक पहुंचने के लिए उसी बारकोड पर दोबारा 5 हजार रुपये का ट्रांजेक्शन कराया गया। कुछ देर बाद आरोपी बच्चे के साथ फिर कैफे पहुंचा और रकम लेने लगा। इसी दौरान पुलिस ने उसे पकड़ लिया और बच्चे को सुरक्षित छुड़ा लिया।

कजिन के जरिए बच्चे को जानता था आरोपी

पुलिस ने आरोपी की पहचान आकाश (22) निवासी लोनी गाजियाबाद के रूप में की है। पूछताछ में उसने बताया कि वह सदर बाजार इलाके में डिलीवरी हेल्पर का काम करता है। वह बच्चे को अपने कजिन के जरिए जानता था। आरोप है कि उसने बच्चे को स्कूटी पर बैठाकर अपने साथ ले गया था।

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गुरुग्राम। गुरुग्राम में कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) के तहत काम करने वाले 20 लाख से अधिक कर्मचारियों को इलाज के दौरान दवाइयों की कमी का सामना करना पड़ रहा है। शहर की 20 से अधिक ईएसआईसी डिस्पेंसरियों में कई महीनों से महंगी दवाइयां उपलब्ध नहीं हैं। मरीजों को दवाइयां निजी मेडिकल स्टोर से खरीदनी पड़ रही हैं। परेशानी यह है कि इन दवाइयों के बिलों का भुगतान भी करीब डेढ़ साल से अटका हुआ है।

कर्मचारी हर महीने अपने वेतन से 25 करोड़ रुपये से अधिक का अंशदान ईएसआईसी में जमा कराते हैं। इसके बावजूद जरूरत के समय डिस्पेंसरी से दवाइयां नहीं मिल रही हैं। मरीजों को बजट नहीं होने का हवाला देकर वापस भेज दिया जाता है। गुरुग्राम सर्कल में कर्मचारियों के करीब 20 करोड़ रुपये के बिल बकाया बताए जा रहे हैं।

पर्ची पर लिख देते हैं NA, बाहर से खरीदनी पड़ती हैं दवाइयां

ईएसआईसी की डिस्पेंसरियों में दवाइयां उपलब्ध नहीं होने पर कर्मचारी मरीज की पर्ची पर NA यानी नॉट अवेलेबल लिख देते हैं। इसके बाद मरीज को संबंधित दवा निजी मेडिकल स्टोर से खरीदनी पड़ती है। दवा खरीदने के बाद कर्मचारी उसका बिल डिस्पेंसरी में जमा कराते हैं। बजट जारी होने पर ईएसआईसी की ओर से भुगतान किया जाता है।

हालांकि, लंबे समय से बजट जारी नहीं होने के कारण बिलों का भुगतान अटका हुआ है। कर्मचारी भुगतान के लिए डिस्पेंसरियों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें बजट नहीं होने की बात कहकर लौटा दिया जाता है।

एक साल से अधिक समय पहले जमा किए बिल, अब तक भुगतान नहीं

ईएसआई डिस्पेंसरी में इलाज कराने वाले राजकुमार ने बताया कि उन्होंने करीब एक साल पहले दवाइयों के बिल जमा कराए थे, लेकिन अब तक भुगतान नहीं मिला है।

लवकेश ने बताया कि उनकी पत्नी बीमार हैं। उन्होंने भी एक साल से अधिक समय पहले दवाइयों के बिल जमा कराए थे। इसके बावजूद उन्हें अब तक भुगतान नहीं मिला।

गुरुग्राम समेत छह जिलों को कवर करता है सर्कल

ईएसआईसी का गुरुग्राम सर्कल गुरुग्राम के अलावा नूंह, रेवाड़ी, नारनौल, बहादुरगढ़ और झज्जर जिलों को कवर करता है। स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि बजट जारी करने के लिए कई बार उच्चाधिकारियों से मांग की गई है। इसके बावजूद राशि नहीं मिलने से कर्मचारियों के बिल लंबित हैं।

अधिकारियों ने बकाया राशि 150 करोड़ रुपये से अधिक होने की बात भी कही है। वहीं, गुरुग्राम सर्कल के स्तर पर करीब 20 करोड़ रुपये के बिल लंबित बताए जा रहे हैं।

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मुकेश मेहता, बुधनी। मध्य प्रदेश के बुधनी से एक ऐसी गंभीर तस्वीर सामने आई है जो मां नर्मदा की स्वच्छता को लेकर बड़े सवाल खड़े कर रही है। बुधनी क्षेत्र में फैक्ट्रियों से निकलने वाले रासायनिक और गंदे पानी का लगातार बहाव ग्रामीणों के लिए बड़ी परेशानी का सबब बन गया है। ग्रामीणों का दावा है कि यह दूषित पानी पिछले कई वर्षों से लगातार बह रहा है, जो खेतों से होता हुआ कालियादेह नदी के रास्ते खर्रा घाट के पास सीधे मां नर्मदा तक पहुंच रहा है।

फैक्ट्रियों के आसपास से निकल रहा दूषित पानी और बदबू

इस पानी के बहाव को लेकर स्थानीय ग्रामीण लंबे समय से शिकायत कर रहे हैं। ग्रामीणों के मुताबिक यह सिलसिला पिछले करीब 8 वर्षों से लगातार जारी है। पानी में भारी मात्रा में सफेद झाग दिखाई देता है और इससे इतनी तेज दुर्गंध उठती है कि आसपास से गुजरने वाले लोगों को मुंह ढंककर निकलना पड़ता है। इस पानी के कारण स्थानीय खेतों, पशुओं और आसपास के प्राकृतिक जलस्रोतों पर पड़ रहे बुरे प्रभावों को लेकर ग्रामीणों में गहरी चिंता है। उनका यह भी अंदेशा है कि इससे पशुओं की मौत, भूजल के प्रभावित होने और गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

पानी के बहाव का रास्ता और कंपनियों के नाम

मैदानी हकीकत जानने के लिए जब ग्राउंड का निरीक्षण किया गया तो पानी के बहाव का पूरा रास्ता सामने आया। शुरुआती पड़ताल में वर्धमान फैक्ट्री की बाउंड्री के पास बने एक बड़े रास्ते से यह पानी बाहर निकलता दिखाई देता है। इसके बाद यह पानी बुधनी-सल्कनपुर रोड के नीचे बनी पुलिया से गुजरते हुए ट्राइडेंट और वर्धमान कंपनियों के बीच से होकर बहता है। इसी हिस्से में ट्राइडेंट की ओर से आने वाला पानी भी इसमें मिलता हुआ नजर आता है। इसके बाद यह पानी आगे बढ़कर खेतों से गुजरता हुआ करीब पांच किलोमीटर का लंबा रास्ता तय करता है।

कालियादेह नदी से होते हुए नर्मदा तक पहुंचता है पानी

ग्रामीणों के अनुसार दोनों कंपनियों की ओर से आने वाले पानी का यह बहाव आगे करीब आधा से एक किलोमीटर तक और बढ़ता है। इसके बाद यह पुराना देवगांव के पास कालियादेह नदी में जाकर मिल जाता है। ग्रामीणों का स्पष्ट दावा है कि इसी कालियादेह नदी के रास्ते से यह दूषित पानी आगे चलकर खर्रा घाट के पास मां नर्मदा में मिल रहा है, जिससे कालियादेह नदी का अस्तित्व भी खतरे में पड़ रहा है। हालांकि इस पानी में कौन-कौन से रासायनिक तत्व मौजूद हैं और इससे पर्यावरण व मानव स्वास्थ्य को कितना नुकसान पहुंच रहा है, इसकी वास्तविक पुष्टि केवल किसी उच्चस्तरीय वैज्ञानिक जांच के बाद ही सामने आ सकेगी, क्योंकि मां नर्मदा सिर्फ एक नदी नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था और जीवन का मुख्य आधार है।

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Punjab Desk, जालंधर : पंजाब में कठोर नियम बनने के बाद भी लगातार बेअगी का मामला सामने आ रहा है. ऐसा ही एक मामला जालंधर में सामने आया है, जहां सेंट्रल टाउन में बेअदबी की घटना सामने आई है. खबर है कि यहां मुख्य नगर कीर्तन के संबंध में लगाए गए बोर्ड पर एक राहगीर युवक ने तेजधार हथियार से हमला कर दिया. घटना वहां लगे CCTV कैमरों में कैद हो गई है. इस घटना के बाद सिख संगत में बेहद नाराजगी देखने को मिली है.

जानकारी के अनुसार, सेंट्रल टाउन में मुख्य नगर कीर्तन के प्रचार के लिए बोर्ड लगाया गया था. आरोप है कि वहां से गुजर रहे एक युवक ने तेजधार हथियार से बोर्ड को नुकसान पहुंचाया. CCTV फुटेज में युवक की यह हरकत कैद हुई है.इस मामले को लेकर गुरुद्वारा दीवान अस्थान, सेंट्रल टाउन कमेटी के सचिव गुरमीत बिट्टू ने कहा कि पुलिस को इस घटना के खिलाफ जल्द उचित कार्रवाई करनी चाहिए.

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पुलिस ने जल्द कार्रवाई नहीं की तो गुरुद्वारा कमेटी की ओर से बड़ा संघर्ष किया जाएगा. यह पहली बार नहीं है जब ऐसा मामला सामने आया है. इसके पहले भी धार्मिक चीजों, मंदिर, मूर्ति, गुरुद्वारे में आपत्तिजनक हरकते लोग पाये गए है जो पूरी तरह से धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाते हैं.

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महाराष्ट्र के जलगांव जिले में भारतीय स्टेट बैंक की शाखा में शनिवार दोपहर 4 सशस्त्र डकैत लुटेरे बैंक के 16 लॉकर तोड़कर लगभग 27 से 35 किलो सोना (करीब 30-38 करोड़ रुपये मूल्य) और 15 लाख रुपये नकद लूटकर फरार हो गए. हालांकि, ग्रामीणों की बहादुरी और जलगांव पुलिस की त्वरित नाकाबंदी के चलते महज कुछ ही घंटों के भीतर चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है.

उनके पास से करीब 15 लाख रुपये की नकदी और सोने से भरे बैग बरामद होने की प्राथमिक जानकारी है. पुलिस पूछताछ में शंकर जासक और गजानन पवार ने जेल की पहचान से लेकर डकैती की योजना तक का पूरा घटनाक्रम बता दिया है.

महाराष्ट्र के जलगांव जिले में भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की शाखा से दिनदहाड़े करोड़ों रुपये की डकैती का सनसनीखेज मामला सामने आया है. शनिवार दोपहर हेलमेट और मास्क पहनकर पहुंचे 4 हथियारबंद डकैतों ने बैंक कर्मचारियों को बंधक बनाकर 16 लॉकर तोड़ दिए. फिर 27 किलो सोना तथा 15 लाख कैश लूटकर फरार हो गए. 

 महाराष्‍ट्र के जलगांव तालुका में स्टेट बैंक की भोकर शाखा में हुई डकैती से हड़कंप मच गया है. इस डकैती के मामले में पुलिस ने शंकर जासक और गजानन पवार के साथ-साथ दो अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया है. उनके पास से करीब 15 लाख रुपये की नकदी और सोने से भरे बैग बरामद होने की प्राथमिक जानकारी है. चौंकाने वाली बात यह है कि इस डकैती में एक बर्खास्‍त पुलिस सब-इंस्‍पेक्‍टर के होने की बात सामने आई है.

बर्खास्‍त पुलिस सब-इंस्‍पेक्‍टर ने जेल में रहते हुए इस पूरी वारदात की साजिश रची थी. डकैतों ने बंदूक की नोक पर बैंक मैनेजर और कैशियर को अपने कब्जे में लिया. विरोध करने पर मारपीट की और दोनों को कुर्सी से बांध दिया.

दहशत फैलाने के लिए आरोपियों ने बैंक के भीतर 2 राउंड फायरिंग की (गनीमत रही कि गोली किसी को नहीं लगी). शंकर जासक ने 2023 में जलगांव शहर के शनिपेठ पुलिस स्टेशन की सीमा के अंतर्गत आने वाली स्टेट बैंक में अपने साले की मदद से तब्बल 3.17 करोड़ रुपये की डकैती डाली थी. इस अपराध के बाद वह जेल में था.

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फरीदाबाद। फरीदाबाद में रविवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की पदयात्रा के मद्देनजर कड़े ट्रैफिक प्रबंध किए गए हैं। एनआईटी क्षेत्र के प्रमुख मार्ग बीके चौक से हार्डवेयर चौक तक का रास्ता लगातार 6 घंटे तक पूरी तरह बंद रहेगा। फरीदाबाद ट्रैफिक पुलिस के अनुसार, यह प्रतिबंध रविवार को सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक लागू रहेगा। इस दौरान इस मार्ग पर दोनों दिशाओं में वाहनों की आवाजाही पर पूरी तरह रोक रहेगी।

वाहन चालकों के लिए तय किए गए वैकल्पिक मार्ग

आम जनता और वाहन चालकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए ट्रैफिक पुलिस ने दो वैकल्पिक मार्ग तय किए हैं। पुलिस की ओर से जारी डायवर्जन प्लान के मुताबिक एनएच-44 की ओर जाना चाहते हैं या वहां से आ रहे हैं, वे बाटा चौक अथवा नीलम-अजरौंदा चौक का इस्तेमाल कर अपने गंतव्य तक पहुंच सकते हैं।

इस क्षेत्र की तरफ जाने वाले वाहन प्याली चौक, डबुआ सब्जी मंडी रोड और मस्जिद चौक की ओर से डायवर्ट किए गए रास्तों से निकल सकेंगे। ट्रैफिक पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि असुविधा से बचने के लिए निर्धारित वैकल्पिक मार्गों का ही उपयोग करें और तय समय के दौरान इस मुख्य मार्ग पर जाने से बचें।

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मयंक श्रीवास्तव, अयोध्या. दीपोत्सव को लेकर रामनगरी में तैयारियां जोरों पर हैं. आगामी 7 नवंबर को श्रीरामजन्मभूमि परिसर मे दीपों की रोशनी से जगमगाएगा. भव्य आयोजन को सफल बनाने के लिए श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं. दीप प्रज्ज्वलन और व्यवस्थाओं के लिए करीब एक हजार कार्यकर्ता सेवा देंगे.

पूरे श्रीरामजन्मभूमि परिसर को पांच जोन में बांटकर कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारियां तय कर दी गई हैं. शनिवार को यात्री सुविधा केंद्र के सभागार में हुई बैठक में दीपोत्सव की कार्ययोजना को अंतिम रूप दिया गया. बैठक में ट्रस्ट के सीईओ एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र (सेवानिवृत्त), सचिव जगदीश आफले और जगन्नाथ गुलवे ने कार्यकर्ताओं को तैयारियों की जिम्मेदारी समझाई.

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जोन एक में श्रीरामलला मंदिर और आसपास के क्षेत्रों में 30 हजार से अधिक दीप जलाए जाएंगे, जिसकी जिम्मेदारी आचार्य केशव जी को दी गई है. जोन दो में कुबेर टीला, सप्तमंडप, शेषावतार मंदिर, हुतात्मा स्मारक और पंचवटी में 30 हजार से अधिक दीप प्रज्ज्वलित होंगे. जोन तीन में वापसी दर्शन मार्ग, यात्री सुविधा केंद्र, पीएफसी प्लाजा और नल टीला पर 14 हजार से अधिक दीप जलाए जाएंगे.

जोन चार में यात्री सेवा केंद्र, अंगद टीला, सीता रसोई और रामानंदाचार्य द्वार पर 13 हजार से अधिक दीप जलेंगे, जबकि जोन पांच में श्रीरामजन्मभूमि पथ, दर्शन मार्ग, सिंह द्वार और चरण पादुका क्षेत्र में 13 हजार दीप प्रज्ज्वलित होंगे. इसमें यूपी पुलिस और सीआरपीएफ का भी सहयोग रहेगा. अधिकारियों के अनुसार अगले पांच दिनों में परिसर के शेष हिस्सों का अलंकरण और दीप प्रज्ज्वलन की तैयारियां पूरी कर ली जाएंगी.

फरीदाबाद। शहर में कूड़ा निस्तारण और डंपिंग यार्ड को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव काफी तेज हो गया है। कांग्रेस के पूर्व विधायक नीरज शर्मा द्वारा केंद्रीय राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर को ‘कूड़ा मंत्री’ कहे जाने पर शनिवार को गुर्जर ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि छोटी मानसिकता वाले लोग कभी बिहारी भाइयों को गालियां देते हैं। जिनकी अपनी वाणी पर संयम नहीं है, उनकी बात क्या करें, यहां तक कि उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष की वाणी पर भी संयम नहीं है। गुर्जर ने आरोप लगाया कि कांग्रेस की मानसिकता सही नहीं है और उसकी भाषा से पार्टी का चरित्र साफ झलकता है।

मंत्रियों के बयानों में अलग-अलग योजनाएं और कांग्रेस का आरोप

दरअसल, भांकरी में डंपिंग यार्ड के विरोध के बाद कूड़ा निस्तारण को लेकर भाजपा सरकार के दो मंत्रियों की ओर से अलग-अलग योजनाएं सामने आई थीं। कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल ने भांकरी में 600 टन क्षमता वाले प्री-प्रोसेसिंग प्लांट को मंजूरी मिलने की बात कही थी। वहीं, दूसरी तरफ केंद्रीय राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर ने प्रतापगढ़ प्लांट की क्षमता 150 टन से बढ़ाकर 750 टन करने और मुजेड़ी में 150 टन का नया प्लांट लगाने का सुझाव दिया था।

इसी बीच कांग्रेस नेता नीरज शर्मा ने आरोप लगाया था कि भांकरी में विरोध के चलते अब प्रतापगढ़ में कूड़ा डाला जा रहा है। उन्होंने मुद्दा उठाया कि शहर में रोजाना 1000 टन से अधिक कूड़ा निकलता है, लेकिन निस्तारण की क्षमता बहुत कम है।

कृष्णपाल गुर्जर बोले- विरोध जायज, लेकिन व्यक्तिगत टिप्पणी गलत

केंद्रीय राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर ने कहा कि भांकरी के अरावली क्षेत्र में कूड़ा डालने का स्थानीय लोगों का विरोध जायज है, लेकिन गाड़ियों को घेरना और किसी पर व्यक्तिगत टिप्पणी करना लोकतांत्रिक तरीका नहीं है।

आंदोलन की तैयारी, प्रतापगढ़ में आज महापंचायत

भांकरी के अरावली क्षेत्र में कूड़ा डालने और प्रतापगढ़ में कूड़ा निस्तारण केंद्र की क्षमता बढ़ाए जाने के विरोध में रविवार को बड़े आंदोलन की तैयारी की गई है। इसके तहत प्रतापगढ़ स्थित सामुदायिक भवन में एक बड़ी महापंचायत बुलाई गई है। आंदोलन से जुड़े आरडब्ल्यूए (RWA) प्रधान सतपाल के अनुसार, महापंचायत में एक से डेढ़ हजार लोगों के पहुंचने की उम्मीद है।

इसके साथ ही भांकरी में कूड़े से भरे ट्रकों को रोकने की योजना बनाई गई है। इसके लिए सोशल मीडिया के माध्यम से आसपास के इलाकों के लोगों से इस आंदोलन में शामिल होने और सहयोग करने की न्यौते के साथ अपील की जा रही है। वहीं, संभावित विरोध और प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस प्रशासन और नगर निगम के अधिकारी पूरी तरह सतर्क हैं।

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देहरादून. उत्तराखंड कांग्रेस के नेता गणेश गोदियाल ने भाजपा के ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि लोकतंत्र को वास्तविक खतरा विपक्ष से नहीं, बल्कि सत्तासीन लोगों से है. उन्होंने सरकार को उसकी शासन संबंधी जिम्मेदारियां याद दिलाते हुए चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने की मांग की है.

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गणेश गोदियाल ने कहा कि साढ़े बारह साल से केंद्र और 10 साल से प्रदेश में सत्ता में रहने वाली भाजपा सरकार खुद पदयात्रा निकालकर नारा दे रही है ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’. आखिर लोकतंत्र को खतरा किससे है? लोकतंत्र को खतरा सत्ता में बैठे लोगों से होता है, जिन पर वोट चोरी और संवैधानिक संस्थाओं पर नियंत्रण के आरोप हैं. पदयात्रा निकालना विपक्ष का काम है, सरकार का काम शासन चलाना और अराजकता रोकना है.

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आगे गणेश गोदियाल ने कहा कि जनता ने सरकार को इसी जिम्मेदारी के लिए चुना है, न कि विपक्ष की भूमिका निभाने के लिए। अगर लोकतंत्र बचाना है, तो चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाइए. चुनाव आयोग भाजपा से जुड़े अधिकारियों के तबादले करे और चुनाव में अनैतिक संसाधनों के इस्तेमाल पर रोक लगाए. नारा होना चाहिए लोकतंत्र को भाजपा की सत्ता से बचाओ, अराजकता हटाने की जिम्मेदारी सरकार निभाओ!