कुंदन कुमार, पटना। शहर में गंगा नदी के जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि ने दियारा क्षेत्र और नदी किनारे बसी बस्तियों के लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बढ़ते पानी के कारण कई निचले इलाकों और बस्तियों में बाढ़ का पानी घुस गया है, जिससे जनजीवन प्रभावित हुआ है। इस स्थिति से निपटने के लिए जिला प्रशासन और एनडीआरएफ (NDRF) की टीमें पूरी मुस्तैदी के साथ राहत और बचाव कार्य में जुटी हुई हैं। प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और उन्हें हरसंभव मदद मुहैया कराने का सिलसिला तेजी से चल रहा है।
दीघा घाट पर बनाया गया मुख्य राहत शिविर
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने पटना के प्रमुख दीघा घाट के पास मुख्य सड़क पर एक राहत शिविर का निर्माण किया है। इस शिविर में प्रशासनिक अधिकारी और बचाव दल के सदस्य लगातार मौजूद रहकर व्यवस्थाओं की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। यहां बाढ़ पीड़ितों के लिए खाने-पीने की उचित व्यवस्था की गई है, ताकि संकट के इस समय में लोगों को बुनियादी जरूरतों के लिए परेशान न होना पड़े।
कल से जारी है रेस्क्यू ऑपरेशन
गंगा के जलस्तर में अचानक आए उछाल के बाद से ही एनडीआरएफ की टीम एक्शन मोड में है। कल से ही लगातार रेस्क्यू अभियान चलाकर दियारा और तटीय इलाकों में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा रहा है। प्रशासन प्राथमिकता के आधार पर बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को सुरक्षित ठिकानों पर शिफ्ट कर रहा है ताकि किसी भी तरह की अनहोनी से बचा जा सके।
जनप्रतिनिधियों ने लिया जायजा, दिए आवश्यक निर्देश
आज बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों और राहत शिविरों की जमीनी हकीकत जानने के लिए दीघा क्षेत्र के विधायक संजीव चौरसिया और स्थानीय बीजेपी सांसद रविशंकर प्रसाद ने दीघा घाट स्थित राहत शिविर का दौरा किया। दोनों जनप्रतिनिधियों ने शिविर में पहुंचकर वहां रह रहे लोगों से मुलाकात की, उनका हालचाल जाना और उनकी समस्याओं को ध्यान से सुना। इस दौरान उन्होंने मौके पर मौजूद प्रशासनिक अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की और उन्हें कई जरूरी निर्देश भी दिए।
मवेशियों और लोगों की सुरक्षा पर विशेष जोर
निरीक्षण के दौरान सांसद रविशंकर प्रसाद और विधायक संजीव चौरसिया ने अधिकारियों से स्पष्ट शब्दों में कहा कि बाढ़ प्रभावित किसी भी व्यक्ति या उनके मवेशियों को राहत सामग्री और बुनियादी सुविधाओं के मामले में कोई असुविधा नहीं होनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि पशुओं के लिए चारे और चिकित्सा की पुख्ता व्यवस्था हो ताकि इस प्राकृतिक आपदा के समय इंसानों के साथ-साथ बेजुबान मवेशियों को भी सुरक्षित रखा जा सके। प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और राहत कार्यों को और तेज कर दिया गया है ताकि प्रभावितों को जल्द से जल्द राहत मिल सके।



