पटना। ​राजधानी पटना की राजनीतिक फिजा में उस समय हड़कंप मच गया जब राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नवनिर्वाचित विधान पार्षद (MLC) सुनील सिंह के खिलाफ शहर में विवादित पोस्टर चस्पा किए गए। इन पोस्टरों ने राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है।

​पोस्टर में बिहार का नटवरलाल का संबोधन

​पोस्टर में सुनील सिंह को तंज कसते हुए बिहार का नटवरलाल करार दिया गया है। इसमें उन्हें MLC बनने पर व्यंग्यात्मक अंदाज में बधाई दी गई है। इन पोस्टरों में केवल सुनील सिंह ही नहीं, बल्कि उनके पूरे परिवार को निशाना बनाया गया है। पोस्टर में उनकी पत्नी और बेटे की तस्वीरें भी प्रमुखता से लगाई गई हैं जिससे यह मामला और भी संवेदनशील हो गया है।

​FIR के जरिए लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोप

​पोस्टर लगाने वालों ने कानूनी दस्तावेजों का हवाला देते हुए गंभीर वित्तीय अनियमितताओं का दावा किया है। इसमें तीन अलग-अलग FIR का जिक्र है:

  • ​FIR संख्या 305: सुनील सिंह पर यादव समाज की एक महिला से 16.5 लाख रुपये के गबन का आरोप।
  • ​FIR संख्या 306: उनकी पत्नी पर 23.5 लाख रुपये के धोखाधड़ी का आरोप।
  • ​FIR संख्या 307: उनके पुत्र यशस्वी पर 3.75 लाख रुपये के कथित गबन का आरोप।
  • ​पोस्टर के अंत में महागठबंधन पर तंज कसते हुए लिखा गया है धोखाधड़ी एवं लूट-खसोट के मुखिया सुनील सिंह को MLC बनने पर बधाई। हालांकि इन पोस्टरों को किसने लगवाया है इसकी पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है।

​राजनीतिक गलियारों में खलबली और भाजपा का हमला

​सुनील सिंह, जो राजद के एक मुखर नेता माने जाते हैं के खिलाफ इस तरह का सार्वजनिक अपमान राजद के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। कांग्रेस ने इस पूरे घटनाक्रम को ‘रिशुश्री’ और टेंडर घोटाले से जोड़ते हुए अपनी प्रतिक्रिया दी है, जिससे मामला और गहरा गया है।
​वहीं भाजपा ने इस मौके को भुनाते हुए महागठबंधन पर तीखा प्रहार किया है। भाजपा प्रवक्ता प्रभाकर मिश्रा ने कहा यह महागठबंधन का राजनीतिक दिवालियापन है। यदि उन पर लगे आरोप सही हैं, तो उन्हें विधान परिषद क्यों भेजा गया? महागठबंधन को स्पष्ट करना चाहिए कि वे किसे अपना नेता मान रहे हैं एक सम्मानित व्यक्ति को या किसी कथित घोटालेबाज को?
​यह घटना न केवल राजद के भीतर के समीकरणों पर सवाल उठाती है, बल्कि महागठबंधन की कार्यप्रणाली पर भी कई अनुत्तरित प्रश्न छोड़ गई है।