सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर पैलेट गन के इस्तेमाल पर लोगों ने रोक लगाने की मांग की है. इनमें याचिकाकर्ता यशोवर्धन आजाद, प्रशांत कुमार और शेख इरशाद मंसूरी शामिल हैं, जिनका दावा है कि दिल्ली में 20 जुलाई को ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान वे पैलेट गन से घायल हो गए थे. पेलेट गन के इस्तेमाल का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट पहुंचे 25 वर्षीय शेख इरशाद मंसूरी की मेडिको-लीगल केस (MLC) रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है.

शेख इरशाद मंसूरी ने दावा किया कि RAF ने अचानक पंप-एक्शन गन चलाई, जिससे छर्रे जैसी पैलेट गोलियां चारों ओर फैल गईं. ये गोलियां उनके शरीर में घुस गईं, जिससे उन्हें तुरंत दर्द हुआ और खून बहने लगा.

शेख इरशाद मंसूरी को घायल होने के बाद उन्हें लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां उनके शरीर में फंसी पैलेट गोलियों को निकालने के लिए सर्जरी की गई. पैलेट गन के इस्तेमाल का आरोप लगाने वाले 25 वर्षीय शेख इरशाद मंसूरी की मेडिको-लीगल केस (MLC) रिपोर्ट सामने आई है.

लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज के ENT एवं हेड-नेक सर्जरी विभाग की 24 जुलाई की एमएलसी रिपोर्ट के अनुसार, सर्जरी के दौरान शरीर में फंसे कण निकाले गए. डायग्नोसिस करते समय मरीज के सिर और गर्दन के कई हिस्सों में कण फंसे हुए थे.

ENT ऑपरेशन थिएटर के अनुसार, मरीज के दाएं चेहरे की हड्डी के अंदर, दाएं कंधे, दाईं गर्दन और बाएं माथे से लगभग 2 मिमी आकार के धातु के कण निकाले गए.

नेत्र रोग विभाग के अनुसार, मरीज की बाईं आंख के हिस्से और निचली पलक की सर्जरी कर वहां से भी विदेशी कण निकाला गया. रिपोर्ट में कहा गया है कि निकाला गया कण लगभग 3×3 मिमी आकार का था.

एक मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, शेख इरशाद मंसूरी ने बताया कि सर्जरी के बाद उनके शरीर से कुल सात पेलेट जैसे धातु के कण निकाले गए हैं. उन्होंने कहा कि चेहरे के आसपास अभी भी कुछ ऐसे कण मौजूद हैं.

एक समाचार रिपोर्ट से पता चला है कि RAF की लॉगबुक के अनुसार, 20 जुलाई को उनके द्वारा पैलेट गन से सात राउंड फायरिंग की गई. पुलिस की कारवाई को लेकर CRPF की एक रिपोर्ट के माध्यम से खुलासा हुआ है कि प्रदर्शनकारियों पर कारवाई के दौरान सभी SPOs और दंगा रोधी ड्रिल का पूरी तरह पालन किया गया था.

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