पटना। शहर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल, पीएमसीएच (PMCH) में मंगलवार को नर्सों के कार्य बहिष्कार से स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह चरमरा गई हैं। पिछले 6 घंटों से इमरजेंसी, ओटी (OT) और अन्य महत्वपूर्ण सेवाएं ठप हैं, जिससे मरीजों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। बारिश के बीच नर्सें कैंपस में लगातार विरोध-प्रदर्शन कर रही हैं।
मौत के बाद बढ़ा तनाव
यह सारा विवाद सोमवार को 55 वर्षीय मरीज अरविंद सिंह की मौत के बाद शुरू हुआ। अरविंद सिंह पीएमसीएच में पिछले 20 वर्षों से कार्यरत सीनियर स्टाफ नर्स लक्ष्मी कुमारी के पति थे। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में इलाज के दौरान लापरवाही बरती गई, जिसके कारण उनकी जान गई। बेटे शिवम कुमार के अनुसार, उनके पिता का डायलिसिस चल रहा था, लेकिन समय पर उचित इलाज नहीं मिला।
मारपीट का आरोप और नर्सों का आक्रोश
मृतक के परिजनों का आरोप है कि जब उन्होंने लापरवाही का मुद्दा उठाया, तो जूनियर डॉक्टरों ने उनके दोनों बेटों को कमरे में बंद कर बेरहमी से पीटा। इतना ही नहीं, बीच-बचाव करने पहुंची नर्सों के साथ भी मारपीट की गई। इस घटना के बाद से ही अस्पताल परिसर में तनाव का माहौल है। नर्सों की मुख्य मांग दोषी डॉक्टरों पर तत्काल कार्रवाई और अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
स्वास्थ्य विभाग की सात सदस्यीय जांच टीम
बढ़ते हंगामे को देखते हुए अस्पताल अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार सिंह मौके पर पहुंचे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने 7 सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया है। इस टीम को 7 दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।
कमेटी में शामिल सदस्य:
- डॉ. कुमारी मंजू (HOD, स्त्री एवं प्रसूति विभाग)
- डॉ. दिनेश कुमार (यूरोलॉजी विभाग)
- डॉ. विनय कुमार (सर्जरी विभाग)
- डॉ. राजन कुमार और डॉ. पंकज हंस (मेडिसिन विभाग)
- डॉ. राजीव आनंद (आर्थोपेडिक्स विभाग)
- अहिल्या कुमारी (सीनियर नर्स)
मरीजों की बढ़ी परेशानी
हड़ताल के कारण अस्पताल में अफरा-तफरी का माहौल है। इलाज के लिए आए दानापुर के नीतीश कुमार सोनी ने बताया कि उन्हें स्ट्रेचर तक उपलब्ध नहीं हो पाया। उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि अस्पताल में अक्सर ऐसी हड़तालें होती हैं, लेकिन भुगतना हमेशा आम मरीजों को ही पड़ता है। फिलहाल, प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा बातचीत की कोशिशें जारी हैं, ताकि जल्द से जल्द सेवाएं बहाल की जा सकें।

