राजकुमार पाण्डेय की कलम से
मंत्रीजी की कुर्सी जाती दिख रही है
कर्नल सोफिया पर की गई टिप्पणी के बाद भी मंत्रीजी अपनों के चहेते बने हुए थे. कई दिग्गज तो सामने आकर मंत्रीजी की पैरवी करते दिखे थे. महीने बीते तो माहौल भी सामान्य होने लगा था, लेकिन इस बीच कोर्ट ने अपने तेवर दिखाए तो मंत्रीजी की कुर्सी हिलती दिखी. मंत्रीजी कमजोर पड़े तो नेताजी के नाम से दम भरने वालों ने ही किनारा करना शुरू कर दिया है. उनके वफादार सिपहसालार ही कहने लगे हैं कि अब तो मंत्रीजी की कुर्सी जाती दिख रही है.
4 एकड़ में 70 पेटी की सौदेबाजी
मामला और कहीं का नहीं प्रदेश की राजधानी भोपाल का ही है. जहां 4 एकड़ में डेवलप हो रही कॉलोनी पर नेताजी की नजर पड़ गई. संदेश भेजा गया कोई तकलीफ नहीं देगा, बस 70 पेटी का सौदा कर लो. डेवलपर भी पॉवरफुल था और कागजात भी पूरे थे तो डेवलपर भी अड़ गया कि काहे की सौदेबाजी. फिर क्या था अगले दिन ही पहुंच गई नपती के लिए टीम और नपती होने तक काम रोकने के लिए निर्देशित किया गया. समझदार डेवलपर को मामला भांपने में देर नहीं लगी तो सौदेबाजी की सहमति के बाद ही टीम वापस रवाना हुई.
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सरकारी बंगला नया ठिकाना
पुलिस सेवा के अफसरों की मैदानी पोस्टिंग के लिए भोपाल में कई ठिकाने बनते आए हैं. ठिकाने के तौर पर इन दिनों एक नए सरकारी बंगला की चर्चा काफी ज्यादा है. फॉर्मूला बताया जा रहा है कि मैदानी पोस्टिंग चाहिए तो बंगले में आना-जाना शुरू कर दो. इस बात की चर्चा अफसरों के अधिक उनके वाहन चालकों के बीच चर्चा का विषय है. वाहन चालकों का मेल-जोल होने पर आपस में सहज भाव से पूछ ही लेते हैं कि आपके साहब बंगला गए थे क्या.
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मैनेजमेंट से मंत्री जी नाराज
एक दौर था जब मंत्रीजी के मैनेजमेंट के कसीदे गढ़े जाते थे, लेकिन हाल ही में हुए घटनाक्रम में मैनेजमेंट जीरो प्रतिशत चला. यानी पूरा का पूरा मैनेजमेंट फेल. शुरुआती दौर में मंत्रीजी को बताया गया कि दो-तीन दिन तो मामला उछलता ही है, उसके बाद सब सामान्य. लेकिन लंबे समय बाद भी असामान्य स्थिति बनी रही तो मंत्रीजी अब अपने मैनेजर शिष्यों से खासे नाराज हो गए हैं. बड़ी बात ये है कि सप्ताहभर बाद भी मंत्रीजी की नाराजगी सतत चली आ रही है.

