भागलपुर। ​पुलवामा आतंकी हमले में शामिल कुख्यात आतंकी हमजा बुरहान के खात्मे की खबर के बाद पूरे देश में राहत है, लेकिन शहीद रतन ठाकुर के पिता रामनिरंजन ठाकुर के लिए यह खबर घावों पर मरहम लगाने के बजाय उस दर्द को फिर से ताजा कर गई है। एक पिता के रूप में, वे आतंक के खिलाफ सख्त कार्रवाई का समर्थन करते हैं, लेकिन उनके मन में सरकार से अधूरे वादों का मलाल भी है।

​”आतंकवाद का जड़ से सफाया हो”

​रामनिरंजन ठाकुर का मानना है कि हमजा की मौत से उन्हें थोड़ी शांति मिली है, लेकिन उनके बेटे की शहादत का गम कभी कम नहीं हो सकता। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश को चुनौती देने वाले इन आतंकवादी सरगनाओं को पूरी तरह खत्म कर देना चाहिए। जब तक इन ताकतों का सफाया नहीं होगा, शहीद जवानों की आत्मा को असली शांति नहीं मिलेगी। उन्होंने पाकिस्तान की इस नापाक हरकत को अक्षम्य बताया और देश की सुरक्षा के लिए कठोर नीति की वकालत की।

​”अधूरे वादों का बोझ और घर का सहारा”

​शहीद रतन ठाकुर अपने परिवार के इकलौते कमाऊ सदस्य थे। पिता के अनुसार, हमले के बाद सरकार और राजनेताओं ने ढेरों घोषणाएं की थीं, लेकिन जमीनी हकीकत आज भी वैसी ही है। हालांकि, राज्य सरकार द्वारा छोटे बेटे को नौकरी मिलने का उन्हें संबल मिला है, लेकिन अन्य वादे अभी भी कागजों तक ही सीमित हैं। उन्होंने दुख व्यक्त किया कि जिस बेटे को उन्होंने पाल-पोसकर बड़ा किया, उसका सुख उन्हें नसीब नहीं हुआ।

​शहादत की यादें और 14 फरवरी का संकल्प

​हर साल 14 फरवरी को रामनिरंजन ठाकुर अपने शहीद बेटे को श्रद्धांजलि देने के लिए खुद खर्च उठाकर एक छोटा सा कार्यक्रम आयोजित करते हैं। यह दिन उनके लिए सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि उस बेटे की याद है जिसने 2011 में CRPF ज्वाइन की थी।

​वह आखिरी फोन कॉल

​शहीद रतन ठाकुर की पत्नी राजनंदनी के लिए 13 फरवरी 2019 की शाम आखिरी संपर्क थी। रतन ने फोन कर बताया था कि वे श्रीनगर जा रहे हैं। अगले दिन जब टीवी पर आतंकी हमले की खबर आई, तो परिवार की दुनिया उजड़ गई। कमांडर से संपर्क करने पर मिली अनिश्चितता और फिर बेटे के मोबाइल का बंद होना, परिवार के लिए एक बुरे सपने जैसा था। अंत में जब शहादत की खबर आई, तो पूरा परिवार स्तब्ध रह गया। आज भी यह परिवार उस कमी के साथ जी रहा है जिसे कोई भी आर्थिक मदद कभी पूरा नहीं कर सकती।