चंडीगढ़। पंजाब की राजनीति में मचे घमासान के बीच मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मंगलवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। आम आदमी पार्टी के 6 राज्यसभा सांसदों के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने को असंवैधानिक करार देते हुए सीएम मान ने इसे ‘संविधान की हत्या’ बताया। उन्होंने राष्ट्रपति को पंजाब के 95 विधायकों के हस्ताक्षर वाला एक मांग पत्र भी सौंपा और इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की।

2 विधायक और 6 सांसद… यह कैसा लोकतंत्र?

राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद मीडिया से चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान ने तीखे सवाल दागे। उन्होंने कहा कि पंजाब विधानसभा में भाजपा के मात्र 2 विधायक हैं, लेकिन अब राज्यसभा में उनके 6 सांसद हो गए हैं।

यह कैसे संभव है? क्या यह संविधान का मजाक नहीं है?

मान ने तर्क दिया कि दलबदल कानून के तहत किसी पार्टी का विलय तभी मान्य होता है जब दो-तिहाई धड़ा प्रस्ताव पास करे। सिर्फ एक सदन के सदस्य अपनी मर्जी से पाला बदलकर दूसरी पार्टी के नहीं हो सकते।

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बागी सांसदों पर साधा निशाना: ‘इंकलाब था तो इस्तीफा देते’

मुख्यमंत्री ने बागी सांसदों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि अगर उनमें नैतिकता बची थी, तो उन्हें इस्तीफा देकर जाना चाहिए था। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि पहले ये लोग भाजपा को गुंडों और डराने-धमकाने वालों की पार्टी कहते थे, लेकिन आज वहां जाकर ये वाशिंग मशीन में धुल गए हैं। अगर वाकई इंकलाब लाना था, तो पद छोड़ते और भाजपा की टिकट पर दोबारा चुनकर आते।

संविधान में राइट टू रिकॉल की मांग

सीएम मान ने जोर देकर कहा कि अब समय आ गया है जब संविधान में ‘राइट टू रिकॉल’ (वापस बुलाने का अधिकार) का प्रावधान शामिल किया जाए। उन्होंने कहा कि यदि कोई प्रतिनिधि जनता की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरता या गद्दारी करता है, तो उसे पद से हटाने की शक्ति जनता के पास होनी चाहिए।

मुख्यमंत्री ने भावुक होते हुए कहा कि पंजाब के लोगों ने भारी बहुमत से विधायकों को चुना और उन विधायकों ने राज्यसभा सदस्य चुने। यह जनता का जनादेश था, जिसका इन सांसदों ने अपमान किया है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि पंजाब के लोग ऐसी राजनीतिक गद्दारी को कभी स्वीकार नहीं करेंगे।