Rahul Gandhi as Lord Parashuram On his Birthday: वरिष्ठ कांग्रेस सांसद और लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी आज अपना 56वां जन्मदिन मना रहे हैं। जन्मदिन पर राहुल गांधी को लोग बधाई संदेश दे रहे हैं। इसी बीच काशी के गंगा घाट से जन्मदिन पर राहुल गांधी का नया लुक सामने आया है। गंगा घाट पर यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने राहुल गांधी के जन्मदिन पर जश्न मनाया। इस दौरान राहुल गांधी का पोस्टर लिए हुए थे उसमें उन्हें भगवान परशुराम (lord parashuram) के अवतार में दिखाया था। राहुल गांधी के एक हाथ में परशुराम का फरसा और दूसरे हाथ में संविधान लिए हुए दिखाया गया है।
राहुल गांधी की भगवान परशुराम के अवतार वाली तस्वीर राजनीति के बदलते मिजाज, सामाजिक समीकरणों और नैरेटिव की जंग को बयां कर रही है। इस तस्वीर के जरिए यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने सियासी संदेश देने की कोशिश की है। भगवान परशुराम के अवतार में राहुल गांधी की तस्वीर लेकर गंगा घाट पहुंचे यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने गंगा नदी में उनकी तस्वीर पर दूध चढ़ाई। इसके बाद केक भी काटा।
भगवान परशुराम के रूप में दिखाने के राजनीति मायने
भगवान परशुराम को न्याय, साहस और ब्राह्मण समाज के अस्मिता के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। उनके हाथ का फरसा अत्याचारी राजाओं के खिलाफ कमजोरों की रक्षा और न्याय की स्थापना का शस्त्र रहा है। भगवान परशुराम को ब्राह्मण समाज से जोड़कर देखा जाता है। राहुल गांधी को परशुराम के अवतार में पेश कर ब्राह्मण समाज को सियासी संदेश देने की कवायद की है। ब्राह्मण मतदाताओं को अपने पाले में लाने के लिए विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच ‘परशुराम’ के प्रतीक को अपनाने की होड़ देखी गई है। भाजपा के ‘कट्टर हिंदुत्व’ के मुकाबले कांग्रेस खुद को एक ऐसी समावेशी पार्टी के रूप में पेश करना चाहती है, जो सनातन परंपराओं का सम्मान करती है, लेकिन बिना किसी उन्माद के।
हाथ में संविधान ‘न्याय’ का संदेश
राहुल तस्वीर के दूसरे हाथ में भारतीय संविधान की प्रति है। बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा रचित भारत का संविधान आधुनिक लोकतंत्र में न्याय, समानता और अधिकारों का सबसे बड़ा कवच है। इस तस्वीर के माध्यम से राहुल गांधी को एक ऐसे आधुनिक नायक के रूप में पेश करने की कोशिश की गई है, जो सनातन परंपरा के मूल्यों (न्याय और संकल्प) को साथ लेकर आधुनिक लोकतांत्रिक मूल्यों (संविधान) की रक्षा के लिए खड़ा है। 2024 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन के लिए ‘संविधान बचाओ’ का नारा गेम-चेंजर साबित हुआ था। राहुल गांधी ने अपनी लगभग हर रैली में संविधान की प्रति दिखाकर पिछड़े, दलित और आदिवासी समाज को यह संदेश दिया था कि उनका हक और आरक्षण सिर्फ संविधान के सुरक्षित रहने पर ही सुरक्षित है।
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