Rajasthan News: राजस्थान के उदयपुर जिले में जिला प्रशासन का एक अजीबो-गरीब आदेश सामने आया है, जिसने शिक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जिले के अतिरिक्त जिला कलेक्टर वार सिंह द्वारा जारी आदेश के तहत शिक्षकों की ड्यूटी भेड़ निष्क्रमण एवं नियमन कार्यक्रम में लगा दी गई है। आदेश में साफ तौर पर लिखा है कि इस कार्य के लिए नियंत्रण कक्ष बनाया गया है, जो जुलाई से अगले आदेश तक चलेगा।

इस नियंत्रण कक्ष के लिए 10 कर्मचारियों को तैनात किया गया, जिनमें से 8 शिक्षक हैं। आदेश के बाद से ही शिक्षक संगठनों और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों में भारी नाराजगी है। विरोध सिर्फ धरातल पर नहीं, बल्कि सोशल मीडिया पर भी जमकर सामने आ रहा है। शिक्षकों ने इस फैसले को शिक्षा के साथ मज़ाक बताया और इसकी तत्काल वापसी की मांग की है।
शिक्षक संगठनों का कड़ा विरोध
राजस्थान पंचायती राज एवं माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष शेर सिंह चौहान ने इस फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा, विद्यालयों में अभी नया सत्र शुरू हुआ है। छात्र पढ़ाई को लेकर गंभीर हैं, और शिक्षक उन्हें पढ़ाना चाहते हैं। लेकिन प्रशासन शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक और बेतुके कामों में लगाकर शिक्षा व्यवस्था को ही बिगाड़ रहा है। शिक्षामंत्री को इस तरह के आदेशों पर तत्काल रोक लगानी चाहिए।
सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सा
आदेश सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसकी तीखी आलोचना हो रही है। #शिक्षक_या_चरवाहा जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। कुछ शिक्षकों ने तो इस पर तंज कसती हुई कविताएं और व्यंग्यात्मक पोस्ट भी लिखी हैं, जो तेजी से वायरल हो रही हैं। लोग सवाल उठा रहे हैं कि अगर शिक्षकों से भेड़ों की निगरानी करानी है, तो शिक्षा का क्या होगा?
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