Rajasthan Nikay Chunav 2026: राजस्थान निकाय चुनाव के दूसरे चरण का मतदान खत्म होते ही भाजपा ने बोर्ड गठन की रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। चुनाव परिणाम से पहले पार्टी ने कई जगह अपने प्रत्याशियों को गुप्त स्थानों पर शिफ्ट करना शुरू कर दिया है।

अजमेर में 79 प्रत्याशियों को पुष्कर के होटल में भेजा गया है, जबकि कोटा के प्रत्याशियों को शुक्रवार देर रात अन्य स्थान पर शिफ्ट किया गया। जयपुर में नगर निगम प्रत्याशियों को शनिवार दोपहर 12 बजे शहर मुख्यालय पहुंचने के निर्देश दिए गए हैं। भाजपा इसे बाड़ेबंदी नहीं, बल्कि प्रशिक्षण वर्ग बता रही है।

प्रदेश महामंत्री श्रवण सिंह बगड़ी का कहना है कि भाजपा के प्रत्याशियों को चुनाव के बाद की जिम्मेदारियों के लिए वरिष्ठ नेताओं से प्रशिक्षण दिलाया जाता है। उनका कहना है कि पार्टी की प्राथमिकता संगठन और जनसेवा है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ भी प्रत्याशियों को एक जगह रखने की कवायद को बाड़ेबंदी मानने से इनकार कर चुके हैं।

जयपुर में प्रत्याशियों को 12 बजे बुलाया

दूसरे चरण का मतदान खत्म होने के बाद जयपुर में भाजपा ने नगर निगम प्रत्याशियों को शनिवार दोपहर 12 बजे शहर मुख्यालय पहुंचने को कहा है। प्रत्याशियों से आवश्यक सामान साथ लाने के लिए भी कहा गया है। यहां से उन्हें निजी होटल में ले जाने की तैयारी है। अजमेर और कोटा में प्रत्याशियों को पहले ही सुरक्षित स्थानों पर भेजा जा चुका है। महिला प्रत्याशियों के साथ उनके पति और बच्चों को भी रखने की बात सामने आई है।

मोबाइल रखने की अनुमति नहीं होने की भी चर्चा

भाजपा की इस कवायद के बीच प्रत्याशियों पर निगरानी को लेकर भी चर्चा है। बताया जा रहा है कि कुछ स्थानों पर प्रत्याशियों को मोबाइल फोन साथ रखने की अनुमति नहीं है। पार्टी की कोशिश है कि चुनाव परिणाम के बाद बोर्ड गठन के दौरान उसके निर्वाचित पार्षद एकजुट रहें। दरअसल, केवल बहुमत का आंकड़ा हासिल करना ही बोर्ड गठन के लिए पर्याप्त नहीं माना जाता। अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव में क्रॉस वोटिंग या निर्दलीय पार्षदों की भूमिका से समीकरण बदल सकते हैं। ऐसे में पार्टी चुनाव परिणाम से पहले ही संभावित राजनीतिक खींचतान को रोकने की तैयारी में जुट गई है।

भाजपा बोली- बाड़ेबंदी कांग्रेस की राजनीति

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ और प्रदेश महामंत्री श्रवण सिंह बगड़ी ने बाड़ेबंदी के आरोपों पर कांग्रेस पर पलटवार किया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि बाड़ेबंदी कांग्रेस की राजनीति से जुड़ी है। मदन राठौड़ ने पूर्ववर्ती अशोक गहलोत सरकार का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस के शासन में विधायकों को लंबे समय तक होटलों में रखा गया था। उनके मुताबिक, उसे बाड़ेबंदी कहा जाता है। भाजपा में चुनाव जीतने के बाद जनप्रतिनिधियों को जनता की सेवा और जिम्मेदारियों के निर्वहन का प्रशिक्षण दिया जाता है।

बोर्ड गठन तक एकजुट रखने की रणनीति

राजनीतिक नजरिए से देखें तो भाजपा की यह कवायद सीधे बोर्ड गठन की रणनीति से जुड़ी दिखाई देती है। परिणाम आने के बाद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव तक पार्षदों को एकजुट रखना पार्टी के लिए अहम होगा। बहुमत होने के बावजूद अगर कुछ पार्षद अलग रुख अपनाते हैं या क्रॉस वोटिंग होती है, तो बोर्ड गठन का पूरा समीकरण बदल सकता है। यही वजह है कि भाजपा चुनाव परिणाम से पहले ही अपने प्रत्याशियों को एकजुट रखने की तैयारी में जुट गई है। पार्टी इसे प्रशिक्षण वर्ग बता रही है, लेकिन प्रत्याशियों को अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव तक साथ रखने की तैयारी ने निकाय चुनाव के बाद की सियासत को अभी से गरमा दिया है।

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