Rajasthan Nikay Chunav 2026 के दोनों चरणों का मतदान पूरा होते ही भाजपा ने चुनावी आकलन शुरू कर दिया है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, कई निकायों में मतदान उम्मीद के मुताबिक नहीं रहने से खासकर नगर निगमों को लेकर शुरुआती गणित बदला है। बीकानेर, अजमेर और भरतपुर में बोर्ड बनाने के लिए भाजपा को कड़ी मशक्कत करनी पड़ सकती है। पाली को लेकर भी पार्टी तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं मान रही है।

चुनाव से पहले भाजपा ने 309 नगरीय निकायों में से करीब 209 में बोर्ड बनाने का आकलन किया था। अब मतदान के बाद पार्टी अलग-अलग निकायों से मिले फीडबैक के आधार पर इस अनुमान की समीक्षा कर रही है। करीब 70 निकायों को पहले ही डांवाडोल श्रेणी में रखा गया था।

मदन राठौड़ ने संभाला मोर्चा

मतदान खत्म होने से पहले ही भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ जयपुर पहुंच गए। इसके बाद प्रदेश भाजपा कार्यालय में चुनावी आकलन शुरू हुआ। देर रात तक संगठन के नेताओं और अलग-अलग स्तर पर लगाए गए पदाधिकारियों से फीडबैक लिया जाता रहा।

सबसे ज्यादा नजर उन नगर निगमों पर है, जहां मुकाबला भाजपा के शुरुआती अनुमान से अधिक चुनौतीपूर्ण बताया जा रहा है। पार्टी के स्तर पर स्थानीय चुनावी समीकरणों और मिले फीडबैक की समीक्षा की जा रही है।

भरतपुर, बीकानेर और अजमेर पर खास नजर

भरतपुर नगर निगम को लेकर भाजपा ने अपनी रणनीति तेज कर दी है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और संगठन के भरोसेमंद पदाधिकारियों को यहां के चुनावी समीकरणों पर नजर रखने को कहा गया है।

बीकानेर और अजमेर में भी इसी तरह की तैयारी है। इन जगहों पर बोर्ड बनाने के लिए भाजपा को ज्यादा मेहनत करनी पड़ सकती है। पाली को लेकर भी अभी स्थिति स्पष्ट नहीं मानी जा रही है।

जयपुर में भी बदला शुरुआती आकलन

राजधानी जयपुर में भी भाजपा के शुरुआती अनुमान के मुकाबले सीटों की संख्या कुछ कम रहने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि पार्टी अभी भी यहां बोर्ड बनाने को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नजर आ रही है।

वहीं जोधपुर, कोटा, उदयपुर और अलवर में भाजपा की स्थिति अपेक्षाकृत मजबूत बताई जा रही है।

कांग्रेस ने भी शुरू किया निकायवार फीडबैक

कांग्रेस ने भी मतदान खत्म होने के बाद निकायवार फीडबैक जुटाना शुरू कर दिया है। पार्टी ने अभी यह दावा नहीं किया है कि कितने निकायों में उसके बोर्ड बनेंगे। हालांकि शुरुआती आकलन में कांग्रेस अपनी स्थिति सत्ताधारी भाजपा के मुकाबले मजबूत बता रही है।

कांग्रेस का दावा है कि कई नगर निगमों में भी उसकी स्थिति बेहतर है। पार्टी की नजर सिर्फ बोर्ड बनने पर नहीं है। उसका मुख्य फोकस वोट प्रतिशत पर भी है।

कांग्रेस मतदान प्रतिशत और अपने वोट शेयर को 2028 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के लिहाज से अहम संकेतक मान रही है। अब दोनों दलों के आकलन के बीच असली तस्वीर चुनाव परिणाम आने के बाद ही सामने आएगी।

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