संदीप शर्मा, विदिशा। कड़ी मेहनत के एक साल बाद भी अगर छात्र-छात्रा परीक्षा केंद्र पर समय पर नहीं पहुंच पाए तो पूरा दोष उनके सिर आ जाता है। लेकिन जब सिस्टम की लापरवाही होती है तो कोई जिम्मेदार नहीं बनता। यही सवाल एक बार फिर उठ खड़ा हुआ है जब मध्य प्रदेश के विदिशा में Re-NEET परीक्षा के दौरान एक छात्रा मात्र कुछ मिनट की देरी से परीक्षा से वंचित रह गई।
कल 21 जून 2026 को आयोजित Re-NEET परीक्षा में विदिशा के गर्ल्स कॉलेज परीक्षा केंद्र पर एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया। छात्रा रागिनी विश्वकर्मा अपने पिता के साथ परीक्षा देने जा रही थीं। रास्ते में पिता की बाइक पंक्चर हो गई और बारिश भी शुरू हो गई, जिसके कारण वे थोड़ी देर से पहुंचीं। परीक्षा केंद्र के गेट पर उन्हें प्रवेश नहीं दिया गया।
वीडियो में देखा जा सकता है कि पिता बेटी का एग्जाम छूट जाने पर बेसुध होकर गेट के बाहर गिर पड़े और फूट-फूटकर रोने लगे। बेटी पिता को सांत्वना देती नजर आ रही है। पिता ने दर्द भरे स्वर में कहा, “जब पेपर वायरल होता है या सिस्टम में कोई कमी आती है तो सरकार कुछ नहीं करती, लेकिन अगर मेरी बेटी थोड़ी लेट हो गई तो उसे पूरी परीक्षा से वंचित कर दिया गया।”
छात्राओं और परिवारों की मजबूरी:
NEET जैसी परीक्षा के लिए छात्र-छात्राएं साल भर रात-दिन मेहनत करते हैं। परिवार आर्थिक और मानसिक रूप से बहुत कुछ कुर्बान करते हैं। ऐसे में महज कुछ मिनट या छोटी-सी तकनीकी खामी पूरे भविष्य पर सवालिया निशान लगा देती है। सोशल मीडिया पर यह वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है और लोग परीक्षा व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं।
NTA और प्रशासन की भूमिका
NTA के नियम सख्त हैं – गेट बंद होने के बाद किसी भी हाल में एंट्री नहीं। लेकिन कई अभिभावक पूछ रहे हैं कि क्या ऐसी अपरिहार्य परिस्थितियों (बाइक पंक्चर, बारिश, बायोमेट्रिक फेलियर) में थोड़ी छूट नहीं दी जा सकती? विशेषकर तब जब परीक्षा पहले ही पेपर लीक के कारण रद्द हो चुकी हो। यह मामला परीक्षा प्रणाली की संवेदनशीलता और लचीलेपन की कमी पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर लगे होने के बावजूद क्या सिस्टम और मानवीय संवेदना को बैलेंस नहीं किया जा सकता?

