शब्बीर अहमद, भोपाल। मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय (PHQ) में एक तरफ फर्जी मेडिकल बिल घोटाले के जरिए सरकारी खजाने को चूना लगाने का मामला गरमाया हुआ है, तो दूसरी तरफ इसी घोटाले के आरोपियों पर मेहरबानी का बड़ा मामला सामने आया है। PHQ ने 194 सहायक उप निरीक्षकों (ASI) को उप निरीक्षक (SI) के पद पर प्रमोट किया है, जिनमें 16 ऐसे ASI भी शामिल हैं जिन पर फर्जी बिलों के जरिए 66.43 लाख रुपये हड़पने का आरोप है और जिनसे वसूली होना अभी बाकी है।

नियमों के मुताबिक, जब तक किसी कर्मचारी पर विभागीय वसूली पेंडिंग हो, तब तक उसकी पदोन्नति नहीं की जा सकती। ऐसे में इस पदोन्नति के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है और यह मामला विभाग के भीतर भारी चर्चा का विषय बन गया है।

फरवरी 2025 में खुला था करोड़ों का फर्जीवाड़ा

मामले का खुलासा तब हुआ जब फरवरी 2025 में PHQ की कल्याण और लेखा शाखा ने मेडिकल बिलों की जांच शुरू की। जांच में सामने आया कि वर्ष 2023-24 और 2024-25 के दौरान फर्जी ‘प्रोलॉन्ग सर्टिफिकेट’ (गंभीर बीमारी के प्रमाण पत्र) के सहारे करीब 2.87 करोड़ रुपये का फर्जी भुगतान कराया गया था। इस घोटाले में कुल 48 पुलिसकर्मियों के नाम सामने आए थे, जिनमें से 16 पुलिसकर्मी हाल ही में पदोन्नत हुए सूची में शामिल हैं।

तीन कर्मचारियों की हो चुकी है गिरफ्तारी, CM से भी शिकायत

इस बहुचर्चित घोटाले में जांच के बाद पुलिस मुख्यालय की लेखा शाखा में तैनात तीन कर्मचारियों- सूबेदार नीरज अहिरवार, ASI हरिहर सोनी और हर्ष वानखेड़े को गिरफ्तार भी किया जा चुका है। इसके बावजूद, जिन पुलिसकर्मियों से 66 लाख रुपये से ज्यादा की वसूली की जानी बाकी थी, उन्हें प्रमोट कर दिए जाने से पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। मामले की शिकायत मुख्यमंत्री (CM) तक पहुंच गई है, जिसके बाद विभाग में आगे की कार्रवाई को लेकर हड़कंप की स्थिति बनी हुई है।

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