दिल्ली के लाखों बिजली उपभोक्ताओं के लिए राहत की खबर है। पावर परचेज एडजस्टमेंट चार्ज (PPAC) में बढ़ोतरी के बावजूद राजधानी के एक बड़े वर्ग पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा। दिल्ली सरकार का कहना है कि जिन उपभोक्ताओं को बिजली सब्सिडी योजना का लाभ मिलता है, उन पर इस बढ़ोतरी का असर बेहद सीमित रहेगा। सरकार के अनुसार, सब्सिडी के कारण बड़ी संख्या में उपभोक्ता इस अतिरिक्त शुल्क के प्रभाव से काफी हद तक सुरक्षित रहेंगे।
सब्सिडी पाने वाले उपभोक्ताओं को बड़ी राहत
ऊर्जा मंत्री आशीष सूद के अनुसार, राजधानी के कुल 74 लाख बिजली उपभोक्ताओं में से करीब 43.7 प्रतिशत उपभोक्ता ऐसे हैं, जिन्हें या तो पूरी सब्सिडी मिल रही है या वे आंशिक सब्सिडी के दायरे में आते हैं। मंत्री ने बताया कि इन उपभोक्ताओं के बिजली बिल पर PPAC में बढ़ोतरी का कोई खास प्रभाव नहीं पड़ेगा। सरकार की सब्सिडी योजना के कारण बड़ी आबादी को बिजली दरों में होने वाले बदलावों से राहत मिलती रहेगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इसका अतिरिक्त आर्थिक भार केवल उन उपभोक्ताओं पर पड़ेगा, जिनकी मासिक बिजली खपत 400 यूनिट से अधिक है। सरकार के अनुसार, ऐसे उपभोक्ताओं पर भी इस बढ़ोतरी का असर सीमित रहेगा और बिल में अधिकतम 2.5 % तक ही वृद्धि देखने को मिलेगी। इससे आम घरेलू उपभोक्ताओं पर इसका बड़ा प्रभाव नहीं पड़ेगा।
पश्चिम एशिया संकट से बढ़ी बिजली उत्पादन की लागत
ऊर्जा मंत्री आशीष सूद ने बताया कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ा है, जिससे ईंधन और बिजली उत्पादन लागत में वृद्धि हुई है। मंत्री के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आने के बाद कोयले की लागत भी बढ़ी, जिसके चलते बिजली उत्पादन करने वाली कंपनियों का खर्च बढ़ गया। इस कारण वितरण कंपनियों को भी महंगी दरों पर बिजली खरीदनी पड़ी।बिजली वितरण कंपनियों ने बढ़ी हुई लागत का हवाला देते हुए दिल्ली विद्युत नियामक आयोग (DERC) से PPAC में करीब 31 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की अनुमति मांगी थी। हालांकि, आयोग ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया और केवल 2.4 प्रतिशत बढ़ोतरी को मंजूरी दी।
आंकड़ों के अनुसार, राजधानी में 32.34 लाख उपभोक्ता ऐसे हैं जिन्हें 200 यूनिट तक बिजली उपयोग करने पर 100 प्रतिशत सब्सिडी का लाभ मिलता है। इसके अलावा, यदि इन उपभोक्ताओं की खपत तय सीमा से अधिक हो जाती है, तब भी उन्हें 50 % तक की सब्सिडी दी जाती है। इस वजह से उनके बिजली बिल पर पावर परचेज एडजस्टमेंट चार्ज (PPAC) में बढ़ोतरी का प्रभाव लगभग नगण्य माना जा रहा है।
कमर्शियल और इंडस्ट्रियल उपभोक्ताओं पर ज्यादा प्रभाव
आंकड़ों के अनुसार, राजधानी में लगभग 41.66 लाख उपभोक्ता ऐसे हैं, जिन पर इस बढ़ोतरी का प्रभाव देखने को मिल सकता है। इनमें सबसे बड़ी संख्या कमर्शियल और इंडस्ट्रियल श्रेणी के उपभोक्ताओं की है। माना जा रहा है कि बिजली उत्पादन और खरीद लागत में वृद्धि का सीधा असर मुख्य रूप से इसी वर्ग के बिजली बिलों पर दिखाई देगा।
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