प्रदीप मालवीय, उज्जैन। धार्मिक नगरी उज्जैन में शैव और वैष्णव संप्रदायों के बीच पिछले कई दिनों से चला आ रहा आपसी मनमुटाव आखिरकार पूरी तरह समाप्त हो गया है। आगामी सिंहस्थ महाकुंभ 2028 को दिव्य, भव्य और सुरक्षित बनाने के संकल्प के साथ पूर्व में भंग की जा चुकी ‘स्थानीय अखाड़ा परिषद’ को संतों ने सर्वसम्मति से पुनः जीवित कर दिया है।
उज्जैन में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में शैव, वैष्णव, उदासी और नाथ संप्रदाय के सभी स्थानीय अखाड़ों के संत, महंत और महामंडलेश्वर एक जगह पर नजर आए। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत रवींद्र पुरी महाराज (निरंजनी अखाड़े) और स्थानीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत डॉ. रामेश्वर दास महाराज की संयुक्त अध्यक्षता में यह बहाली की गई।
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श्रीमहंत रवींद्र पुरी ने कहा कि सभी संप्रदायों के आपसी गतिरोध दूर हो चुके हैं और अब संतों की टोली मुख्यमंत्री के विजन के अनुरूप उज्जैन में चल रहे घाटों के निर्माण व विकास कार्यों का स्थलीय निरीक्षण करेगी। वहीं राष्ट्रीय स्तर पर अध्यक्ष पद को लेकर चल रहे विवाद पर स्थानीय अध्यक्ष डॉ. रामेश्वर दास ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि अखिल भारतीय स्तर की लड़ाई से स्थानीय परिषद का कोई संबंध नहीं है। स्थानीय स्तर पर सभी संत पूरी तरह एक हैं, उनका एकमात्र लक्ष्य सिंहस्थ को ऐतिहासिक बनाना और प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित करना है।
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