कुंदन कुमार/पटना। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के मुख्य प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने आज प्रदेश कार्यालय के कर्पूरी सभागार में एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने बिहार की वर्तमान एनडीए सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जदयू और भाजपा के बीच गहरा अंतर्विरोध पैदा हो गया है। यादव के अनुसार, जदयू इस समय भारी घबराहट और छटपटाहट के दौर से गुजर रही है क्योंकि सत्ता की कमान अब पूरी तरह भाजपा के हाथों में जा चुकी है।
उपमुख्यमंत्रियों की उपेक्षा और ‘गुजरात मॉडल’ का दबाव
शक्ति सिंह यादव ने सनसनीखेज दावा किया कि बिहार में कानून व्यवस्था की हालिया समीक्षा बैठक में दोनों उपमुख्यमंत्रियों को आमंत्रित तक नहीं किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने जदयू के नेतृत्व को ‘रद्दी के कागज’ के समान समझ लिया है। पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा इस स्थिति पर सवाल उठाए जाने पर, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्पष्ट कर दिया कि बिहार सरकार अब भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के दिशा-निर्देशों और ‘गुजरात मॉडल’ पर चलेगी, न कि नीतीश मॉडल पर।
आर्थिक बदहाली और ‘4-C’ का शासन
राजद प्रवक्ता ने सरकार से बिहार की वित्तीय स्थिति पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग की। उन्होंने कहा कि 41,000 करोड़ रुपये खर्च करने के बावजूद बिहार का हर नवजात बच्चा ₹27,000 के कर्ज के साथ पैदा हो रहा है। उन्होंने सरकार के ‘3-C’ (क्राइम, करप्शन, और कॉम्प्रोमाइज) के दावे पर कटाक्ष करते हुए कहा कि वर्तमान सरकार चेयर (कुर्सी), क्राइम और करप्शन से समझौता कर चल रही है, जबकि चौथा सी यानी कम्युनलिज्म (सांप्रदायिकता) को सरकारी स्तर पर बढ़ावा दिया जा रहा है।
कानून व्यवस्था और जातीय विद्वेष के आरोप
शक्ति सिंह यादव ने कहा कि बिहार में अपराध की आड़ में जातीय विभेद पैदा किया जा रहा है। उन्होंने सम्राट चौधरी के उस बयान का हवाला दिया जिसमें उन्होंने पिछले 20 वर्षों में 70 हजार हत्याओं की बात स्वीकार की थी। यादव ने तंज कसा कि नीतीश कुमार की राजनीति को उनके ही सहयोगियों ने ‘फिनिश’ कर दिया है। राजद का मानना है कि अब बिहार में सीधा मुकाबला भाजपा और राजद के बीच है, क्योंकि जदयू वैचारिक रूप से समाप्त हो चुकी है।
अल्पसंख्यकों के हितों के साथ विश्वासघात
संवाददाता सम्मेलन में यह आरोप लगाया गया कि जदयू ने वक्फ संशोधन विधेयक और एनआरसी जैसे मुद्दों पर भाजपा का साथ देकर अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर कुठाराघात किया है। राजद नेताओं ने कहा कि सराय रंजन जैसी मॉब लिंचिंग की घटनाओं पर सरकार की चुप्पी उसकी नीयत साफ करती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लालू प्रसाद और तेजस्वी यादव ने कभी भी सांप्रदायिक शक्तियों से समझौता नहीं किया, जबकि जदयू ने सत्ता के लिए आरएसएस की विचारधारा को मजबूती प्रदान की है।
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