Dharm Desk – वैशाख माह में पड़ने वाला रोहिणी व्रत इस बार 20 अप्रैल को मनाया जाएगा. यह व्रत हिंदू और जैन धर्म दोनों में विशेष आस्था और महत्व रखता है जन्हा इसे आत्म-अनुशासन, भक्ति और आंतरिक शुद्धि का प्रतीक माना जाता है. शुभ रोहिणी नक्षत्र में रखा जाने वाला यह व्रत आध्यात्मिक चिंतन, प्रार्थना और संयम के जरिए जीवन में संतुलन लाने का संदेश देता हैं.

धार्मिक मान्यता के अनुसार, रोहिणी नक्षत्र भगवान कृष्ण का जन्म नक्षत्र है. इसलिए इस दिन उपवास और पूजा का विशेष फल मिलता है. श्रद्धालु इस दिन उपवास रखते हैं. नकारात्मक विचारों से दूर होकर आध्यात्मिक उन्नति का प्रयास करते हैं. व्रत के दौरान आत्मसात करने से व्यक्ति अपने विचारों और कर्मों को सकारात्मक दिशा में ढाल पाता है.
हिंदू परंपरा में यह व्रत जहां भगवान कृष्ण की कृपा पाने और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए रखा जाता है, वहीं जैन धर्म में इसे आत्म-शुद्धि, अहिंसा और संयम की साधना के रूप में देखा जाता है. विशेष रूप से महिलाएं इस दिन अपने परिवार के स्वास्थ्य, कल्याण और समृद्धि के लिए प्रार्थना करती है.
व्रत और पूजा को विशेष पुण्यदायी
ज्योतिष शास्त्र में रोहिणी नक्षत्र को अत्यंत शुभ माना गया है. प्राचीन ग्रंथों में भी इस नक्षत्र के दौरान किए गए व्रत और पूजा को विशेष पुण्य दायी बताया गया है. मान्यता है कि इस दिन उपवास और साधना करने से मानसिक शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्राप्त होता है. रोहिणी व्रत केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्म-संयम, सादगी और ईश्वर से जुड़ने की एक आध्यात्मिक यात्रा है, जो जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की प्रेरणा देती है.
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