Dharm Desk – भगवान शिव तंत्र और साधना के अधिपति है, जो अपने भक्तों पर शीघ्र प्रसन्न होने के कारण आशुतोष कहलाते है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शिव महापुराण में वर्णित रुद्राभिषेक ऐसा दिव्य उपाय है जो साधक की हर मनोकामना को पूर्ण करने की क्षमता रखता है. यही कारण है कि सावन जैसे पवित्र माह में रुद्राभिषेक का महत्व और भी बढ़ जाता है और श्रद्धालु पूरे विधि-विधान से महादेव का अभिषेक करते है.

रुद्राभिषेक की महिमा और प्रभाव होते हैं सरदार

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार रुद्र भगवान शिव का ही उग्र और शक्तिशाली स्वरूप है रुद्राभिषेक के दौरान शिवलिंग पर मंत्रों के साथ विभिन्न पवित्र पदार्थ अर्पित किए जाते है. जिनका अलग-अलग आध्यात्मिक महत्व होता है. शुक्ल यजुर्वेद के रुद्राष्टाध्यायी मंत्रों के साथ किया यह अभिषेक ग्रह दोष, बाधाओं और जीवन की कठिनाइयों को दूर करने वाला माना जाता है. मान्यता है कि इससे न केवल कष्टों का नाश होता है. बल्कि मनोकामनाएं भी शीघ्र पूर्ण होती हैं.

अलग-अलग अभिषेक के विशेष फल मिलते हैं

शास्त्रों में रुद्राभिषेक के दौरान उपयोग होने वाले पदार्थों को विशेष फलदायक बताया गया है.

  1. सबसे पहले बात करते हो भगवान शिव का घी से अभिषेक करने पर वंश वृद्धि होती है.
  2. इक्षुरस यानी गन्ने के रस से अभिषेक करने से दुर्योग समाप्त होते हैं.
  3. शक्कर मिले दूध से अभिषेक करने से विद्या और ज्ञान की प्राप्ति होती है.
  4. शहद से अभिषेक पुरानी बीमारियों को दूर करने वाला माना गया है.
  5. गाय के दूध से अभिषेक करने पर आरोग्य मिलता है और शक्कर मिले जल से संतान प्राप्ति के योग बनते हैं.
  6. भस्म से अभिषेक मोक्ष प्रदान करने वाला बताया गया है.

रुद्राभिषेक का सही समय और महत्व

किसी भी पूजा के लिए सही समय और मुहूर्त का विशेष महत्व होता है. रुद्राभिषेक के लिए भी तिथियों का ध्यान रखना जरूरी बताया गया है. ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, जब शिवजी का निवास मंगलकारी होता है, तब किया गया रुद्राभिषेक अधिक फल दायी होता है. शुक्ल पक्ष की द्वितीया और नवमी, तथा कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा, अष्टमी और अमावस्या जैसे दिन इस पूजा के लिए शुभ माने गए हैं.

इन खास अवसरों पर नहीं देखना पड़ता मुहूर्त

हालांकि कुछ विशेष पर्व ऐसे भी है. जब रुद्राभिषेक के लिए तिथि का विचार आवश्यक नहीं होता. महाशिवरात्रि, प्रदोष व्रत और सावन के सोमवार जैसे पावन दिनों में बिना मुहूर्त देखे भी रुद्राभिषेक किया जा सकता है. इसके अलावा, सिद्ध पीठ और ज्योतिर्लिंग जैसे पवित्र स्थलों पर भी यह पूजा सदैव शुभ मानी है.

इससे भी महादेव जल्दी होते प्रसन्न

भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए केवल विधि ही नहीं, बल्कि सच्ची श्रद्धा भी जरूरी है. ओम नमः शिवाय का जाप, बेलपत्र अर्पण और नियमित पूजा-अर्चना से भी महादेव की कृपा शीघ्र प्राप्त होती है. जिससे जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है.