समस्तीपुर। भारतीय रेलवे के कर्मचारी न केवल सुरक्षित ट्रेन परिचालन के लिए जाने जाते हैं बल्कि वे विषम परिस्थितियों में मानवता की मिसाल पेश करने से भी पीछे नहीं हटते। समस्तीपुर रेल मंडल के लोको पायलटों ने अपनी अदम्य साहस और त्वरित सूझबूझ का परिचय देते हुए बीते दो महीनों में ट्रैक पर खुदकुशी करने आए चार लोगों की जान बचाई है। इस सराहनीय कार्य के लिए मंडल रेल प्रबंधक (DRM) ज्योति प्रकाश मिश्रा ने इन सतर्क रेलकर्मियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया है।
पहली घटना: मां-बच्चे को मौत के मुंह से निकाला
22 जून को समस्तीपुर-सहरसा सवारी गाड़ी (63346) अपने गंतव्य की ओर जा रही थी। सलौना और इमली स्टेशन के बीच लोको पायलट अभय कुमार और सहायक लोको पायलट जय प्रकाश कुमार-1 ने देखा कि एक महिला अपने बच्चे के साथ रेल ट्रैक पर लेटी हुई है। खतरे को भांपते हुए उन्होंने बिना देरी किए इमरजेंसी ब्रेक लगाकर ट्रेन को सुरक्षित दूरी पर रोका। तत्पश्चात, दोनों ने मौके पर पहुंचकर महिला को समझा-बुझाकर ट्रैक से हटाया और ग्रामीणों की मदद से उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया।
दूसरी घटना: मालगाड़ी के सामने खड़ी महिला की सुरक्षा
22 मई को रक्सौल-सिकटा के बीच मालगाड़ी लेकर जा रहे लोको पायलट मनोज कुमार-2 और सहायक लोको पायलट मणिभूषण कुमार ने ट्रैक पर एक महिला को देखा। मालगाड़ी का वजन अधिक होने के बावजूद उन्होंने सतर्कता दिखाते हुए ट्रेन रोक दी। महिला हटने को तैयार नहीं थी तब सहायक लोको पायलट ने समझदारी दिखाते हुए महिला के बच्चे को गोद में ले लिया जिससे प्रेरित होकर महिला खुद ट्रैक से हट गई। पूछताछ में महिला ने घरेलू कलह के कारण जान देने की बात स्वीकार की।
तीसरी घटना: ढेंग-रीगा के बीच टला हादसा
01 मई को रक्सौल-दरभंगा सवारी गाड़ी (75230) के चालक दल, लोको पायलट पंकज कुमार और सहायक लोको पायलट श्रवण कुमार शर्मा ने ढेंग और रीगा स्टेशनों के बीच ट्रैक पर एक व्यक्ति को लेटा हुआ देखा। समय रहते इमरजेंसी ब्रेक के इस्तेमाल से अनहोनी टल गई और व्यक्ति की जान बाल-बाल बच गई।
डीआरएम ने की सराहना
डीआरएम ज्योति प्रकाश मिश्रा ने कहा कि ये घटनाएं साबित करती हैं कि हमारे रेलकर्मी समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी बखूबी समझते हैं। उन्होंने अन्य लोको पायलटों से भी आह्वान किया कि वे ड्यूटी के दौरान सतर्क रहें। आपकी एक छोटी सी सावधानी किसी का पूरा परिवार उजड़ने से बचा सकती है। लोको पायलटों का यह साहस पूरे विभाग के लिए गर्व का विषय है।

