Odisha Desk, संभलपुर: 1 अगस्त को पश्चिमी ओडिशा की कला, भाषा, संस्कृति और स्वाभिमान का प्रतीक ‘संबलपुरी दिन’ (Sambalpuri Din) पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। महान संबलपुरी भाषाविद और साहित्यकार गुरु सत्यनारायण बोहीदार की जयंती के अवसर पर आयोजित होने वाले इस विशेष पर्व ने इस वर्ष संबलपुर में अपनी सफलता के 14 वर्ष पूरे कर लिए हैं।
आज से 14 वर्ष पूर्व एक बेहद छोटे स्तर पर शुरू किया गया यह सांस्कृतिक अभियान, समय के साथ-साथ आज एक विशाल राज्यस्तरीय उत्सव का रूप ले चुका है। शुरुआत में सीमित दायरे तक सिमटा यह दिन अब न केवल संबलपुर बल्कि पूरे ओडिशा और देश-विदेश में बसे उड़िया समुदाय के बीच बहुत बड़े पैमाने पर धूमधाम से मनाया जा रहा है।
संबलपुर शहर में इस विशेष दिवस के अवसर पर ‘पश्चिमांचल एकता मंच’ और ‘संबलपुरी एकता मंच’ की ओर से भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों और रैलियों का आयोजन किया गया। इसके अलावा, संबलपुर के जुड़वां शहरों हीराकुद और बुर्ला में भी स्थानीय सामाजिक और सांस्कृतिक संगठनों द्वारा विभिन्न सार्वजनिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।
इस दिन संबलपुर, हीराकुद और बुर्ला की सड़कों पर एक अलग ही उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला। सरकारी और निजी कार्यालयों, स्कूलों, कॉलेजों और बैंकों में लोग पारंपरिक संबलपुरी साड़ी, कुर्ता और पगड़ी (संबलपुरी बंधकला वस्त्र) पहनकर पहुंचे।
शहर के मुख्य चौराहों पर ढोल, निशान, तासा और मादल जैसे पारंपरिक वाद्यों की गूंज पर युवाओं और सांस्कृतिक समूहों ने संबलपुरी लोकनृत्य प्रस्तुत किया। इस अवसर पर पश्चिमी ओडिशा के पारंपरिक व्यंजनों का आनंद भी लोगों ने लिया।
14 वर्षों की इस यात्रा ने यह साबित कर दिया है कि अपनी जड़ों, बोली और हथकरघा कला को सहेजने का यह अनूठा प्रयास अब ओडिशा की पहचान बन चुका है।
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